भागलपुर में मानसून की सुस्त रफ्तार से बढ़ी उमस, मौसम विभाग ने 30 जून तक जताई हल्की बारिश की संभावना

Bhagalpur Weather: भागलपुर और आसपास के जिलों में मानसून की धीमी गति के कारण लोग उमस भरी गर्मी से परेशान हैं, वहीं मौसम विभाग ने किसानों को धान की खेती को लेकर विशेष सलाह जारी की है.

भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट

Bhagalpur Weather: भागलपुर जिले में मानसून की सुस्त रफ्तार ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है और लोगों को अब भी झमाझम बारिश का इंतजार है. मौसम विभाग की ओर से लगातार वर्षा की संभावना जताए जाने के बावजूद जिले में अपेक्षित बारिश नहीं हो रही है. सुबह होते ही तेज धूप निकलने के कारण भीषण गर्मी और उमस का प्रकोप बढ़ जाता है. स्थानीय मौसम केंद्र द्वारा हल्की बूंदाबांदी का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया था, लेकिन फिलहाल आसमान साफ होने से गर्मी से कोई राहत नहीं मिली है.

30 जून तक ठनका और हल्की वर्षा का पूर्वानुमान

  • इन जिलों में बारिश के आसार: आगामी 26 जून से 30 जून के बीच भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई जिलों के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक (मेघ गर्जन) के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना जताई गई है.
  • तापमान का मिजाज: इस अवधि के दौरान क्षेत्र का अधिकतम तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने का अनुमान है.

वहीं दूसरी ओर, दक्षिण बिहार के कुछ अन्य जिलों में 26 और 27 जून को भीषण लू (Heat Wave) चलने की आशंका भी जताई गई है, जिसके बाद ही वहां मौसम में बदलाव और हल्की बारिश देखने को मिलेगी.

Bhagalpur Weather: कमजोर मानसून के बीच किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श

धान की बुआई और बिचड़ा तैयार करने के इस मुख्य सीजन में मानसून की बेरुखी को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने अन्नदाताओं के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी की है.

कृषि मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को परामर्श दिया है कि मानसून की कमजोर स्थिति को देखते हुए फिलहाल ऊंची (टांड) भूमि में धान की खेती की शुरुआत न करें. जिन किसानों के पास निजी या सरकारी सिंचाई के पुख्ता साधन उपलब्ध हैं, वे ही मध्यम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों का बिचड़ा (नर्सरी) डालें. साथ ही, पौधों को सूखने से बचाने के लिए समय-समय पर आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई कर खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखें.

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तापमान में बढ़ोतरी और हवा में अत्यधिक नमी के कारण उमस का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, जिससे खरीफ फसलों के प्रबंधन को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम के मिजाज पर नजर रखकर ही खेतों में खाद या कीटनाशकों का छिड़काव करने को कहा है.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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