Uttam Aarjav Dharma: आज के दौर में जब जीवन में दिखावे और बनावट का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जैन धर्म का उत्तम आर्जव धर्म मनुष्य को सरल और निष्कपट जीवन जीने का संदेश देता है. इसी भाव के साथ शुक्रवार को भागलपुर में दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया.
श्री चंपापुर दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र, कबीरपुर नाथनगर समेत भागलपुर के दिगंबर जैन मंदिरों में सुबह से ही धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गयी थीं. श्रद्धालुओं ने भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की और प्रवचन के माध्यम से उत्तम आर्जव धर्म का अर्थ समझा.
सरलता केवल व्यवहार नहीं, जीवन जीने का तरीका
कबीरपुर स्थित सिद्धक्षेत्र में गुजरात के बड़ौदा से आये भूपत राय गांधी ने प्रवचन में कहा कि उत्तम आर्जव का अर्थ सरलता और सहजता है. मन, वचन और कर्म में एकरूपता ही आर्जव धर्म है.
उन्होंने कहा कि व्यक्ति के मन में कुछ और, वाणी में कुछ और तथा कर्म में कुछ और नहीं होना चाहिए. छल-कपट और कुटिलता से दूर रहकर निष्कपट जीवन जीना ही उत्तम आर्जव धर्म का मूल संदेश है.
यह संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है. परिवार, समाज और व्यक्तिगत जीवन में व्यवहार की सरलता और पारदर्शिता को भी इससे जोड़ा जाता है. जब व्यक्ति के विचार और व्यवहार में अंतर कम होता है, तो आपसी विश्वास मजबूत होता है.
भगवान वासुपूज्य का हुआ अभिषेक और शांतिधारा
दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन कबीरपुर स्थित सिद्धक्षेत्र में श्रद्धालुओं ने भगवान वासुपूज्य का अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजा की. मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भक्ति के साथ पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया.
सिद्धक्षेत्र मंत्री सुनील जैन ने कहा कि भौतिकतावादी दौड़ में मनुष्य धीरे-धीरे कृत्रिम होता जा रहा है. ऐसे समय में कपट से दूर और सरल जीवन जीने का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.
उन्होंने कहा कि निष्कपट जीवन जीने वाला व्यक्ति ही परिवार और समाज में सच्चा सम्मान प्राप्त करता है. उनके अनुसार उत्तम आर्जव धर्म मनुष्य को अपने भीतर झांकने और व्यवहार में सहजता लाने की प्रेरणा देता है.
दूसरे शहरों से भी पहुंचे श्रद्धालु
दशलक्षण महापर्व में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग शहरों से श्रद्धालु भागलपुर पहुंचे हैं. इस मौके पर नीमच राजस्थान के नरेंद्र जैन, गुना मध्य प्रदेश के अभय चौधरी, दीनदयाल उपाध्याय नगर यूपी के अंकित जैन, मंगलोर के धनंजय जैन, जयपुर के अतुल जैन, दिल्ली के प्रथमेश जैन समेत जयकुमार काला, कमलेश पाटनी, सुमित बड़जात्या, आलोक जैन, संदीप कुर्मावाला और राम जैन आदि मौजूद थे.
मारवाड़ी टोला लेन में भी विशेष पूजा और प्रवचन
कोतवाली चौक के समीप मारवाड़ी टोला लेन स्थित दिगंबर जैन मंदिर में भी उत्तम आर्जव धर्म को लेकर विशेष पूजा और प्रवचन हुआ. कार्यक्रम आर्यिका पूज्य श्री 105 पूर्णमति माताजी एवं श्री 105 दिव्यमती माताजी ससंघ के सान्निध्य में आयोजित किया गया.
माताजी ने कहा कि मन, वचन और कर्म में सरलता, निष्कपटता और एकरूपता ही उत्तम आर्जव है. उन्होंने श्रद्धालुओं को अपने व्यवहार में सहजता और विचारों में निर्मलता लाने का संदेश दिया.
जैन समाज के अध्यक्ष विजय जैन ने कहा कि कपट से मुक्त और निर्मल मन से ही आत्मा का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है. उन्होंने उत्तम आर्जव धर्म को आत्मशुद्धि और बेहतर जीवन से जोड़कर समझाया.
बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल
मारवाड़ी टोला लेन स्थित मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. इस मौके पर विपुल कुमार जैन, कमलेश जैन, अमित बड़जात्या, अजीत जैन, काशीनाथ, राजेश कुमार, रमन जैन, विजय कुमार, पीयूष कुमार रारा, कमल कुमार, विशाल, वरुण पाटनी, नरेश कुमार, भागचंद काला, सूरज दीपक जैन, मनोज कुमार, राजीव कुमार पाटनी, सोनी काला, रितु छाबड़ा, पीयूष रारा, संजय जैन, विनोद जैन, जय कुमार जैन, मंजू जैन, शालिनी जैन, नवीन जैन, राजेश जैन और सुमंत जैन समेत अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे.
Uttam Aarjav Dharma: शनिवार को उत्तम शौच धर्म की विशेष आराधना
दशलक्षण महापर्व के अगले दिन शनिवार को उत्तम शौच धर्म की विशेष पूजा और आराधना होगी. महापर्व के दौरान जैन समाज में प्रत्येक धर्म के माध्यम से आत्मसंयम, आत्मशुद्धि और बेहतर जीवन मूल्यों पर चिंतन किया जाता है.
भागलपुर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के जरिये श्रद्धालु इन सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. उत्तम आर्जव धर्म का संदेश भी यही है कि व्यक्ति के विचार, वाणी और व्यवहार में सहजता तथा निष्कपटता बनी रहे.
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