Bhagalpur News. बैंकिंग सेवाएं ठप, एटीएम बंद, 300 करोड़ का कारोबार प्रभावित

भागलपुर में हड़ताल का असर.

-केंद्रीय ट्रेड यूनियन कैंपेन कमेटी के आह्वान पर एक दिवसीय हड़ताल केंद्रीय ट्रेड यूनियन कैंपेन कमेटी के आह्वान पर आयोजित देशव्यापी एकदिवसीय हड़ताल का असर जिले में व्यापक रूप से देखा गया. जिले के लगभग सभी राष्ट्रीयकृत बैंक और एटीएम बंद रहे, जिससे करीब 300 करोड़ रुपये का बैंकिंग कार्य प्रभावित हुआ. दरअसल, एसबीआइ और ग्रामीण बैंक का कुछ ब्रांच को छोड़ कर सभी बैंकों में ताले लटके रहे. हालांकि, पूर्व घोषित हड़ताल की वजह से ग्राहकों का पहुंचना कम रहा लेकिन, जो पहुंचे तो उन्हें बेरंग लौटते देखा गया. बैंक कर्मियों ने शहर में कई स्थानों पर धरना दिया. राधा रानी सिन्हा रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया व इंडियन बैंक आंचलिक कार्यालय के पास अरविंद कुमार रामा, तारकेश्वर घोष और नितेश कुमार के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ. पंजाब नेशनल बैंक सर्किल ऑफिस के समीप एपी सिंह और मनोज कुमार घोष के नेतृत्व में धरना दिया गया. बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने कृष्णा और नवनीत एवं केनरा बैंक के पास नीरज कुमार सिंह और सुभाष कुमार सिंह के नेतृत्व में कर्मी जुटे. विभिन्न शाखाओं के सामने भी कर्मी बैनर के साथ दिनभर बैठे रहे. ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाएं भी बंद रहीं. धरने में बड़ी संख्या में महिला बैंक कर्मियों की भागीदारी रही, जिनमें कोमल, सीमा, रितु और समीक्षा शामिल रहीं. इसके अलावा पंकज कुमार, मंतोष कुमार, विकास कुमार, सुनील तांती, गणेश मंडल, प्रमोद कुमार मंडल, पवन कुमार, शंभू डोम, गोपेश कुमार, शब्बीर अहमद, अशोक कुमार दत्ता, ओमप्रकाश तिवारी, एनके अग्रवाल और अमर सिंह समेत लगभग 70-80 कर्मियों ने हिस्सा लिया.

चार लेबर कोड के विरोध में किया प्रदर्शन

हड़ताल का प्रमुख मुद्दा केंद्र सरकार द्वारा लागू चार श्रम संहिताओं का विरोध रहा. बैंक कर्मियों और मजदूर संगठनों का कहना है कि पुराने 29 श्रम कानूनों को समेटकर बनाये गये चार लेबर कोड से श्रमिक अधिकार कमजोर होंगे. उनका आरोप है कि इससे संगठन बनाने, हड़ताल करने और सामाजिक सुरक्षा जैसे अधिकारों पर असर पड़ेगा.

ये मुद्दे उठाये गये

हड़ताल में सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत करने, निजीकरण का विरोध, पर्याप्त नियुक्तियां, आउटसोर्सिंग बंद करने और नयी पेंशन योजना समाप्त कर पुरानी पेंशन बहाल करने की मांगें भी शामिल रहीं. इसके अलावा बड़े औद्योगिक घरानों से बकाया ऋण की सख्ती से वसूली और जीआइसी के एकीकरण जैसे मुद्दे उठाये गये.

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