मुख्य बातें:
भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट
Budhanath Temple: अंग क्षेत्र के सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक शिवालयों में शुमार बाबा बूढ़ानाथ मंदिर में शनिवार को भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा. सुबह पांच बजे पूर्ण विधि-विधान, वैदिक रीति-रिवाज और परंपरा के अनुसार बाबा की विशेष ‘सरकारी पूजा’ संपन्न की गई. इस मुख्य धार्मिक अनुष्ठान के दौरान भगवान आशुतोष का पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा जल, मौसमी फल-फूल, भांग-धतूरा और विशेष पंचामृत से भव्य महाअभिषेक किया गया, जिसे देखने और बाबा की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु तड़के से ही कतारों में खड़े थे.
महंत के सान्निध्य में गूंजे वैदिक मंत्र; प्रबंधन ने संभाली कमान
प्रात:कालीन पूजा अर्चना और व्यवस्थापकीय प्रबंधन से जुड़े मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- शुद्धता और नियम: इस पावन धार्मिक अनुष्ठान को मंदिर के महंत शिवनारायण गिरि के कुशल सान्निध्य व संचालन में मुख्य पुरोहित पंडित अभिषेक पांडेय द्वारा पूरी शुद्धता, निष्ठा और शास्त्रोक्त नियमों के साथ संपन्न कराया गया. पूजा के दौरान पूरा गर्भगृह वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से गुंजायमान रहा.
- सुचारू व्यवस्था: शनिवार को होने वाली भक्तों की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर के प्रबंधक बाल्मिकी सिंह ने सुरक्षा और सहूलियत की कमान खुद संभाली. उन्होंने मंदिर प्रशासन के वालंटियर्स के साथ मिलकर अर्घा व्यवस्था और कतारबद्ध दर्शन की मुकम्मल व्यवस्था की ताकि गर्भगृह में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो.
Budhanath Temple: पट खुलते ही ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंजा शिवालय
जैसे ही सुबह की मुख्य सरकारी पूजा और महाआरती संपन्न हुई, मंदिर के मुख्य पट (कपाट) आम श्रद्धालुओं के दर्शन और जलाभिषेक के लिए खोल दिए गए.
कपाट खुलते ही मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’, ‘बम-बम भोले’ और ‘बाबा बूढ़ानाथ की जय’ के गूंजते जयकारों से पूरी तरह अलौकिक हो उठा. सुबह से ही हाथ में गंगाजल, बेलपत्र और फूल लिए कतारों में खड़े महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने एक-एक कर बाबा का जलाभिषेक किया और सुख-समृद्धि की मन्नतें मांगीं.
अभिषेक का यह सिलसिला दोपहर बाद तक अनवरत चलता रहा, जिससे पूरा क्षेत्र पूरी तरह शिवमय नजर आया. मंदिर प्रबंधन के अनुसार, आने वाले सावन महीने की तैयारियों को लेकर भी रूपरेखा बनाई जा रही है ताकि बाहर से आने वाले कांवरियों को भी सुगम दर्शन लाभ मिल सके.
