भागलपुर जिले के अकबरनगर और आसपास के दियारा क्षेत्रों में गंगा नदी के रौद्र रूप ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. बुधवार को नदी के जलस्तर में हुई तीव्र वृद्धि से बाढ़ का पानी कई गांवों के निचले इलाकों और रिहायशी घरों में घुस गया है. गंगा का फैलाव तेजी से मुंगेर-भागलपुर मुख्य मार्ग (NH-80) के किनारे तक पहुंच चुका है. हालांकि मुख्य सड़क अधिक ऊंचाई पर होने के कारण फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन घाटों के किनारे से सड़क की घटती दूरी और दियारा के जलमग्न होने से सैकड़ों परिवारों के सामने विस्थापन और चारे का गहरा संकट खड़ा हो गया है.
कई दियारा गांव जलमग्न, घरों में घुसा बाढ़ का पानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीण क्षेत्रों के निचले हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है:
- पूरी तरह डूबे इलाके: श्रीरामपुर, शाहाबाद, कल्याणपुर और नयी मोतीचक दियारा इलाका पूरी तरह जलमग्न हो चुका है.
- घरों में जलभराव: छीट मकंदपुर, खुटाहा, बसंतपुर, फुलवरिया और पैन गांवों के निचले हिस्से पानी में डूब गए हैं. कई घरों में पानी घुसने और चारों तरफ से घिर जाने के कारण लोग जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए हैं.
- किसानों की फसलें डूबीं: सैकड़ों एकड़ में लगी फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
NH-80 के करीब पहुंचा पानी: दूरी घटी, बढ़ी दहशत
मुंगेर-भागलपुर एनएच-80 के समानांतर कई बिंदुओं पर बाढ़ का पानी मुख्य सड़क के बिल्कुल पास आ गया है:
- इंग्लिश चिचरोंन घाट: यहां बाढ़ का पानी NH-80 से मात्र 20 मीटर की दूरी पर हिलोरे मार रहा है.
- अमिया और खेरेहिया घाट: अमिया घाट के पास सड़क से पानी की दूरी करीब 100 मीटर और खेरेहिया घाट पर लगभग 200 मीटर बची है.
- सड़क किनारे जलजमाव: भवनाथपुर के खुटाहा, किशनपुर, भवनाथपुर और फुलवरिया के पास एनएच-80 के दोनों किनारों के गड्ढों में पानी लबालब भर गया है. प्रशासन का कहना है कि सड़क की ऊंचाई अधिक होने से यातायात फिलहाल सुचारु है, लेकिन जलस्तर पर पैनी नजर रखी जा रही है.
अमिया घाट पर डेगी नाव शुरू, जान जोखिम में डालकर सफर
दियारा से जमीनी संपर्क टूट जाने के बाद ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है:
- चारा लाने का संकट: दियारा में मवेशियों के लिए चारा लाने गए किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
- असुरक्षित नाव परिचालन: बुधवार से अमिया घाट पर 3-4 छोटी 'डेगी नावों' का संचालन शुरू किया गया है. क्षमता से अधिक लोगों और पशुओं के सवार होने के कारण हर समय बड़े हादसे का खतरा बना रहता है. ग्रामीणों ने सुरक्षित और बड़ी सरकारी नावों के परिचालन की मांग की है.
