मनरेगा कार्यों में लापरवाही बरतने वाले पंचायत रोजगार सेवकों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशों की अनदेखी और ई-केवाईसी कार्य में कमजोर प्रगति पाए जाने पर जिले के विभिन्न प्रखंडों के 17 पंचायत रोजगार सेवकों के मूल मानदेय में 15 प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया गया है. यह कार्रवाई उप विकास आयुक्त, भागलपुर के आदेश पर की गयी है. जानकारी के अनुसार, मनरेगा के तहत सक्रिय जॉब कार्डधारकों के ई-केवाईसी सत्यापन में जिले की औसत उपलब्धि 70.6 प्रतिशत रही है, जबकि संबंधित पंचायत रोजगार सेवकों के क्षेत्रों में प्रगति इससे काफी कम पाई गयी. कई बार निर्देश और स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर इसे घोर अनुशासनहीनता और कर्तव्यहीनता की श्रेणी में रखा गया है.
इन रोजगार सेवकों का कटा वेतन
वेतन कटौती फरवरी 2026 से जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेगी. कार्रवाई की जद में आने वालों में जगदीशपुर प्रखंड से सीता राम सिंह, सुधांशु शेखर सिन्हा, संजीव सुमन और रविंद्र कुमार, नाथनगर से गति कल्याणी कुमारी, सबौर से राकेश कुमार, नवगछिया से असीत कुमार और दिलीप कुमार चौधरी, कहलगांव से मनोज कुमार और संजय कुमार, सुलतानगंज से जय प्रकाश राम, गोपालपुर से पुष्पेंद्र कुमार सिंह और गोपाल कृष्ण तथा नारायणपुर से अखिलेश कुमार दास शामिल हैं. जिला प्रशासन ने सभी संबंधित कर्मियों को तीन दिनों के भीतर ई-केवाईसी का शत-प्रतिशत कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है. चेतावनी दी गई है कि भविष्य में लापरवाही मिलने पर अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, नियमानुसार कर्मियों को आदेश के विरुद्ध 30 दिनों के भीतर अपील का अवसर दिया गया है.
