भागलपुर जिले में ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के अंतर्गत संचालित स्वच्छता मित्र ऐप से मिली ताजा रिपोर्ट में पता चला है कि पंचायतों में कचरा उठाने के लिये लगाये गये बड़ी संख्या में ई-रिक्शा खराब हालत में हैं और नियमित सफाई कार्य प्रभावित हो रहा है. गुरुवार को हुई समीक्षा बैठक में डीडीसी प्रदीप कुमार सिंह ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया. रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 237 कचरा उठाव वाहन उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से 130 वाहन खराब होने के कारण उपयोग में नहीं हैं. कई पंचायतों में बैट्री खराब होने और मरम्मत नहीं होने की वजह से गाड़ियां महीनों से खड़ी हैं. सबसे खराब स्थिति जगदीशपुर और शाहकुंड प्रखंड की बतायी गयी है, जहां सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गयी है. कई जगह पुराने पेडल रिक्शा भी बेकार हालत में पड़े मिले हैं. जगदीशपुर और शाहकुंड की स्थिति सबसे खराब समीक्षा में सामने आया कि जगदीशपुर प्रखंड में बहुत कम वाहन चालू हालत में हैं, जबकि शाहकुंड में भी अधिकांश गाड़ियां बंद पड़ी हैं. प्रशासन ने माना कि वाहनों की खराब स्थिति का असर सीधे गांवों की साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर पड़ रहा है. डीडीसी ने सभी संबंधित एजेंसियों और प्रखंड अधिकारियों को सात दिनों के भीतर खराब वाहनों को ठीक कराने का निर्देश दिया है. बिहपुर ने दिखाई बेहतर स्थिति जहां कई प्रखंडों की स्थिति चिंताजनक रही, वहीं बिहपुर प्रखंड जिले में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र बनकर सामने आया. यहां अधिकांश वाहन चालू हालत में पाये गये और नियमित कचरा उठाव कार्य जारी रहने की जानकारी दी गयी. अधिकारियों ने इसे अन्य प्रखंडों के लिए मॉडल के रूप में देखने की बात कही है. बैठक में बंद पड़ी वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट्स को जल्द चालू कराने पर भी जोर दिया गया. इसके साथ ही शाहकुंड के दरियापुर और जगदीशपुर के चांदपुर क्षेत्र में नई प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है. डीडीसी ने स्वच्छता कर्मियों के बकाया मानदेय का भुगतान पंचायती राज फंड से सुनिश्चित करने और इसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया.
bhagalpur news. 55 फीसदी ई-रिक्शा खराब, गांवों में ठप पड़ी कचरा उठाव व्यवस्था पर भड़के डीडीसी
भागलपुर जिले में ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है.
