अर्घदान से मिलता है वैभव व सौभाग्य, छठ पर्व में होती है भगवान सूर्य की पूजा
भागलपुर : व्रतियों ने महापर्व छठ को लेकर शुक्रवार को खरना का प्रसाद ग्रहण किया. इससे पहले व्रती दिनभर उपवास पर रहे और शाम को पूजा-अर्चना की. इस बार शनिवार को पहली अर्घ के रूप में शाम को व्रती व श्रद्धालु अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देंगे और दूसरे दिन रविवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ देंगे. खरना के लिए व्रतियों ने प्रात: से ही उपवास किया और शाम को नये चूल्हे में खीर-पूड़ी, फल, पान, सुपारी आदि का भोग केला पत्ता या मिट्टी के बरतन में भगवान सूर्य को चढ़ाया गया. इसके बाद ही प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण किया.
कहीं दूध-भात या रसिया का भी भोग लगाया गया. पूजन के दौरान छठ के मधुर गीत गाये गये या साउंड सिस्टम पर बजाया गया. कई व्रतियों ने गंगा तट पर ही गंगा जल से प्रसाद तैयार करते हैं. सिकंदरपुर की रुक्मिणी देवी बताया कि खरना को लेकर शुक्रवार को प्रात: ही गंगा स्नान करने बरारी घाट पर चली गयी थी. इसके बाद वहां से गंगा जल लाकर पूजन के स्थान को गंगा जल छिड़क कर शुद्ध किया.
दिनभर उपवास रहा और शाम को खरना का प्रसाद तैयार कर छठी मइया की पूजा की. इसके बाद आसपास के लोगों में भी प्रसाद का वितरण किया. तभी खुद भी प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण किया. अलीगंज की रंभा कुमारी ने बताया कि उनके यहां पर सास छठ पर्व करती है. हरेक दिन अलग-अलग चूल्हे में प्रसाद तैयार किया जाता है. कद्दू-भात के दिन नए चूल्हे में, खरना के दिन नए चूल्हे में और पहली अर्घ के दिन सूप में प्रसाद चढ़ाने के लिए नये चूल्हे में प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि तैयार करते हैं. पटेलनगर की श्वेता सिन्हा ने बताया कि घर में छठ नहीं होता, लेकिन दूसरे के घर में शामिल हुई. खरना का प्रसाद लिया.
