भागलपुर : छवि धूमिल बता पहले कार्य एजेंसी को हटाया, अब बहाल करने की कवायद
भागलपुर : प्राइवेट लाइनमैन की सेवा जिस एजेंसी से ली जा रही थी, उसे पहले नियम व शर्तों के अनुरूप काम नहीं कर पाने के आरोप में न केवल हटाया, बल्कि एफआइआर तक दर्ज कराया और अब उसी कार्य एजेंसी को फिर से रखने की कवायद की जा रही है. कार्य एजेंसी के साथ हटाये […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
भागलपुर : प्राइवेट लाइनमैन की सेवा जिस एजेंसी से ली जा रही थी, उसे पहले नियम व शर्तों के अनुरूप काम नहीं कर पाने के आरोप में न केवल हटाया, बल्कि एफआइआर तक दर्ज कराया और अब उसी कार्य एजेंसी को फिर से रखने की कवायद की जा रही है. कार्य एजेंसी के साथ हटाये गये करीब 18 प्राइवेट लाइनमैन को भी वापस रखने की पहल हो रही है.
बिजली विभाग के जिस प्रमंडल स्तर से कार्य एजेंसी एवं प्राइवेट लाइनमैन को हटाया, वहां से अब विद्युत आपूर्ति अंचल, भागलपुर से पैरवी की जा रही है. सुपरिटेंडेंट इंजीनियर श्रीराम सिंह से विद्युत आपूर्ति प्रमंडल, बांका के कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार ने बालाजी इलेक्ट्रीकल्स नामक कार्य एजेंसी को पुन: कार्य आवंटन करने का दिशा-निर्देश मांगा है.
सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के नाम लिखे गये पत्र में उल्लेख है कि जांच पदाधिकारी द्वारा अंतरिम प्रतिवेदन में प्राथमिकी में नामित दोषी एजेंसी एवं सभी 18 प्राइवेट लाइनमैन (मानव बल) के संबंध में साक्ष्य की कमी उल्लेखित करते हुए कांड का अनुसंधान बंद किया गया है. अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बांका द्वारा ने जांच पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन को संपुष्ट किया है.
यह था मामला : प्रस्तावित हड़ताल के समय से पहले चले जाने पर रजौन विद्युत उपकेंद्र की ठप बिजली चालू होने में देरी हुई. इसके मद्देनजर बिजली विभाग स्तर से बड़ी कार्रवाई की गयी थी. बालाजी इलेक्ट्रीकल्स नामक एजेंसी का एग्रीमेंट रद्द कर दिया गया था. एजेंसी और इसके अधीन दोषी 18 मानव बलों पर रजौन थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. यह घटना चार अक्तूबर, 2018 की है. बालाजी नामक एजेंसी से मानव बलों से लाइन मेंटेनेंस का काम लिया जा रहा था.
चार अक्तूबर, 2018 को सुबह छह बजे से हड़ताल प्रस्तावित था मगर, समय से पहले रजौन फीडर में कार्यरत प्राइवेट लाइनमैन के हड़ताल पर चले जाने से ससमय बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी थी. चार अक्तूबर, 2018 दोपहर 3.30 बजे आपूर्ति बहाल की जा सकी था. मानव बल के प्रस्तावित समय से पहले हड़ताल पर चले जाने से बिजली करीब 10 घंटे 25 मिनट बाधित थी.
इससे उपभोक्ताओं को परेशानी तो हुई ही एसबीपीडीसीएल को 11,48, 438 रुपये का राजस्व नुकसान पहुंचा था. प्राथमिकी दर्ज करने का कारण बिजली आपूर्ति बहाल करने में परेशानी व कंपनी की छवि धूमिल होना बताया गया था.