भागलपुर : विक्रमशिला सेतु के लगभग सभी स्पेन में दरार है, जिसे सफलतापूर्वक ठीक कर लिया गया है मगर, पाया संख्या- दो व तीन के बीच आर्टिकुलेशन (जोड़बंदी) के स्पेंडेड स्पेन में लंबा कई दरार हैं. पूरब से लेकर पश्चिम तक दरार है. यह दरार ऐसा है, जिसे ऊपरी तौर पर ठीक करने से यह टिकाऊ नहीं होगा. इस कारणवश दरार को ठीक करने के लिए स्विजरलैंड से कार्बन प्लेट मंगाना पड़ा है. इसके कैमिकल की खरीदारी मुंबई में हुई है. लाखों रुपये का केवल कैमिकल है. कुल मिला कर दरार को ठीक करने में कार्य एजेंसी को 50 लाख रुपये तक खर्च आयेगा.
जानें क्यों आयी दरार : विक्रमशिला सेतु के एक्सपर्ट बताते है कि यह वही पाया संख्या-तीन है, जो निर्माण के दौरान गंगा में समा गया था. उत्तर प्रदेश राज्य पुल निर्माण निगम को चिह्नित जगह के बदले इससे थोड़ा दूर हटा कर पाया खड़ा करना पड़ा. इस वजह से इस पार्ट के स्ट्रक्चर की लंबाई कुछ ज्यादा हो गयी. यह अब परेशानी का कारण बना है. गेपिंग ज्यादा होने से लोड बढ़ा है, जिससे मेजर दरार आया. अगर, इसका समय-समय पर रखरखाव कार्य होता, तो यह नौबत नहीं आती.
सेतु निर्माण के 14 साल तक कोई रखरखाव कार्य नहीं हुआ. 15 वें साल से मरम्मत की दिशा में कार्रवाई शुरू हुई और 17 वें साल जाकर इसका रखरखाव हो रहा है. पुल निर्माण निगम की ओर से नजरअंदाज करना ही महंगा पड़ा है. जबकि साल 2007 से लगातार कई सालों तक टॉल टैक्स की वसूली होती रही मगर, मरम्मत पर अठन्नी तक खर्च नहीं किया गया. पुल को आवागमन के लिए 2001 से खोला गया है.
