भागलपुर : जून माह में मायागंज अस्पताल का ब्लड बैंक खुद खून के लिए तरस रहा था. जिसे देख अधीक्षक को आदेश देना पड़ा था कि, बिना रक्त दान के किसी भी मरीज को ब्लड न दिया जाये. जिसके बाद कई बार मरीजों ने हंगामा भी किया. आज यहां की व्यवस्था बदल चुकी है. रक्तदान शिविर ने खून की कमी को दूर कर दिया है. अब हालात यह हैं कि, बिहार में यह ब्लड बैंक नंबर एक स्थान पर पहुंच गया है.
मई में बिदाउट एक्सचेंज खून पर लगानी पड़ी थी रोक : मई माह में अस्पताल में भर्ती मरीजों को विदाउट एक्सचेंज खून देने पर रोक लगानी पड़ी थी. इस आदेश से थैलीसीमिया, इमरजेंसी समेत गंभीर रोगी मुक्त थे. इसकी वजह ब्लड बैंक में महज 20 यूनिट का होना बताया गया था.
रक्तदान शिविर ने बदल दी बैंक की हालत : रक्त की कमी को रक्तदान शिविर ने दूर कर दिया. फरवरी से मई माह तक कुल दस रक्तदान शिविर आयोजित हुआ. जबकि जून माह में ही सिर्फ दस रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया. जनवरी में तीन, फरवरी-मार्च में दो-दो व अप्रैल-मई में तीन-तीन रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ था.
जून माह में रिकार्ड 265 यूनिट खून का कलेक्शन
साल 2018 के जनवरी महीने में 197, फरवरी में 144, मार्च में 41, अप्रैल में 158, मई में 175 यूनिट खून का क्लेक्शन विभिन्न शिविरों से किया गया. जून माह में सबसे ज्यादा कलेक्शन 265 यूनिट किया गया. इसमें सबसे महत्वपूर्ण शिविर की बात करें तो वी केयर सोसाइटी ने 54 यूनिट एकत्र किया तो क्लीन नवगछिया ने 45 यूनिट, जबकि आइएमए के डॉक्टरों ने 34 यूनिट ब्लड जमा कर बैंक को दिया.
साल दर साल बढ़ रहे रक्त दानवीर
ब्लड बैंक में रक्तदान करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. साल 2015 में ब्लड बैंक को 6281 यूनिट खून मिला था, वहीं 25 प्रतिशत की वृद्धि के साथ साल 2016 में यह आंकड़ा 7825 यूनिट पर पहुंच गया था. जबकि साल 2017 में यह आंकड़ा 7962 तक पहुंच गया था.
