सुलतानगंज से सबौर तक 41 गांव-मोहल्लों से गुजरेगा मरीन ड्राइव, 668 एकड़ जमीन होगी अधिग्रहित

भागलपुर के लोगों के लिए अच्छी खबर है. सुलतानगंज से सबौर तक प्रस्तावित मरीन ड्राइव परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है. 41.33 किमी लंबे इस फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के लिए 668.824 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा.

Bhagalpur Marine Drive: भागलपुर में सुलतानगंज से सबौर तक प्रस्तावित मरीन ड्राइव अब कागजों से आगे बढ़ता नजर आ रहा है. बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (BSRDCL) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर ली है. सबसे अहम बात यह है कि यह फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर भागलपुर जिले के 41 गांवों और शहरी मोहल्लों से होकर गुजरेगा और इसके लिए करीब 668.824 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा. परियोजना का निर्माण अडानी ग्रुप करेगा, जबकि इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी BSRDCL के पास है.

41.33 किमी लंबा होगा भागलपुर मरीन ड्राइव

प्रस्तावित मरीन ड्राइव की भागलपुर जिले में कुल लंबाई 41.33 किमी होगी. इसमें 30.77 किमी समतल (एट-ग्रेड) खंड और 10.56 किमी एलिवेटेड खंड शामिल रहेगा. सड़क को 100 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के अनुसार विकसित किया जाएगा, ताकि सुलतानगंज, भागलपुर और सबौर के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आ सके.

किन अंचलों की जमीन जाएगी

भूमि अधिग्रहण पांच अंचलों में होगा. सुलतानगंज में सबसे अधिक 250.652 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी. नाथनगर में 213.972 एकड़, सबौर में 94.772 एकड़, नारायणपुर में 70.081 एकड़ और जगदीशपुर में 39.347 एकड़ भूमि परियोजना के लिए ली जाएगी. कुल मिलाकर 668.824 एकड़ जमीन अधिग्रहित होगी.

इन 41 गांव और मोहल्लों से होकर गुजरेगा कॉरिडोर

प्रस्तावित मार्ग सुलतानगंज, नाथनगर, जगदीशपुर और सबौर क्षेत्र के कई गांवों और वार्डों को छुएगा. इनमें सुलतानगंज वार्ड 1, 2, 3 और 8, नवादा, तिलकपुर, कल्याणपुर, चतुर्भुजपुर (शंकरचक), शंकर चौक, तहवरनगर, बसंतचक उर्फ बसंतपुर, बैकटपुर, यूसुफपुर, मिर्जापुर, शहजादपुर, अजमेरीपुर, रत्तीपुर, रसीदपुर, श्रीरामपुर, भागलपुर वार्ड 18, परनाथपुर, दाराबपुर, भागलपुर वार्ड 5, 3 और 1, बरारी, फतेहपुर, सबौर, खनकित्ता, नबीपुर, बगडेर, फरका, भागलपुर वार्ड 24, हबीब चौक, भागलपुर वार्ड 22, मेहरबान चौक, मथुरापुर, कालूपुर और भागलपुर वार्ड 21 शामिल हैं.

दो एलिवेटेड सेक्शन और कई बड़े ढांचे बनेंगे

परियोजना में दो प्रमुख एलिवेटेड सेक्शन होंगे जिनकी लंबाई क्रमशः 1570 मीटर और 8990 मीटर होगी. इसके अलावा चार मेजर ब्रिज, दो माइनर ब्रिज, नौ व्हीकुलर अंडरपास, नौ लाइट व्हीकुलर अंडरपास, 18 स्मॉल व्हीकुलर अंडरपास और 67 पुलियों का निर्माण प्रस्तावित है. पूरी सड़क के दोनों किनारों पर पौधारोपण भी किया जाएगा.

सुलतानगंज-अगुवानी पुल और सुलतानगंज-भागलपुर सड़क के पास टी-जंक्शन बनाया जाएगा, जबकि सबौर में एनएच-33 के निकट ट्रंपेट इंटरचेंज विकसित किया जाएगा.

लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा

यह सड़क कृषि भूमि, ग्रामीण बस्तियों, शहरी क्षेत्रों और गंगा के बाढ़ प्रभावित मैदानों से होकर गुजरेगी. ऐसे में कई किसानों और स्थानीय परिवारों के सामने भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास जैसे सवाल भी खड़े होंगे. दूसरी ओर, तेज कनेक्टिविटी मिलने से व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और पर्यटन गतिविधियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.

विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य बना बड़ी चुनौती

प्रस्तावित मार्ग विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के कुछ हिस्सों से होकर गुजरता है. इसी कारण BSRDCL ने 5 अगस्त को वन मंत्रालय से पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन किया है. पर्यावरण स्वीकृति मिलने के बाद ही परियोजना आगे बढ़ सकेगी.

आखिर क्यों जरूरी है यह मरीन ड्राइव

सुलतानगंज, भागलपुर और सबौर के बीच मौजूदा सड़क नेटवर्क लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव से जूझ रहा है. घनी आबादी, संकरे मार्ग, कई चौराहे और मिश्रित यातायात के कारण यात्रा की गति कम हो जाती है. इससे समय, ईंधन और परिवहन लागत बढ़ती है. प्रस्तावित फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर इन समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकता है.

विशेष रूप से श्रावणी कांवर यात्रा के दौरान सुलतानगंज आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल सकता है.

Bhagalpur Marine Drive: रोजगार के भी खुलेंगे नए अवसर

परियोजना के निर्माण चरण में बड़ी संख्या में कुशल, अर्धकुशल और अकुशल श्रमिकों की जरूरत होगी. इसके अलावा स्थानीय दुकानदारों, निर्माण सामग्री कारोबारियों, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, सुरक्षा गार्ड, सफाईकर्मियों और रखरखाव से जुड़े लोगों के लिए भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है.

फिलहाल परियोजना प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट और पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया में है. अगले चरण में विस्तृत सर्वे, भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है. यही वह चरण होगा जिस पर सबसे ज्यादा नजर स्थानीय लोगों, किसानों और प्रभावित परिवारों की रहेगी.

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By संजीव झा

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