Ramnagar News: भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है. सावन के आगमन के साथ ही पश्चिम चंपारण के रामनगर स्थित ऐतिहासिक श्री नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगेगी. धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और भव्य स्थापत्य कला के कारण यह मंदिर बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और नेपाल के श्रद्धालुओं के लिए भी प्रमुख आस्था केंद्र माना जाता है.
सावन में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
सावन के प्रत्येक सोमवार को हजारों श्रद्धालु बाबा नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव का जलाभिषेक करते हैं. बड़ी संख्या में कांवरिये वाल्मीकिनगर के त्रिवेणी संगम से गंडक नदी का पवित्र जल लेकर करीब 65 किलोमीटर की पदयात्रा कर मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं.
रानी के स्वप्न के बाद हुई थी शिवलिंग की स्थापना
करीब डेढ़ सदी पुराने इस मंदिर का इतिहास रामनगर राज से जुड़ा है. मान्यता के अनुसार सेन वंश के पांचवें एवं रामनगर राज के अंतिम सेनवंशी राजा प्रह्लाद सेन की रानी विंध्यवासिनी देवी को स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन देकर रामनगर में शिवलिंग स्थापित करने का निर्देश दिया था. इसके बाद वर्ष 1879 में मध्य प्रदेश की पवित्र नर्मदा नदी से नर्मदेश्वर शिवलिंग मंगवाकर विशेष मुहूर्त में इसकी स्थापना की गई. इसी कारण मंदिर का नाम श्री नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव मंदिर पड़ा.
सात वर्षों में तैयार हुआ भव्य मंदिर
शिवलिंग की स्थापना के बाद भव्य मंदिर निर्माण शुरू हुआ. मुख्य मंदिर के चारों ओर सूर्य, भगवान विष्णु, गणेश और मां दुर्गा के मंदिर बनाने की योजना बनाई गई. राजा प्रह्लाद सेन के निधन के बाद शाह वंश के राजा मनोहर विक्रम शाह प्रथम और रानी छत्र कुमारी देवी ने निर्माण कार्य पूरा कराया. वर्ष 1886 में पांचों मंदिरों को 90 फीट लंबे और 86 फीट चौड़े विशाल चबूतरे से जोड़ दिया गया.
मुख्य शिव मंदिर का शिखर लगभग 185 फीट ऊंचा है, जबकि चारों सहायक मंदिर लगभग 100 फीट ऊंचे हैं. मंदिर के निर्माण में आगरा, जयपुर, काठमांडू और वाराणसी के प्रसिद्ध शिल्पकारों का योगदान माना जाता है. करीब सात वर्षों में तैयार यह मंदिर आज भी अपनी बेजोड़ नक्काशी और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है.
राज परिवार ने कराया संरक्षण, समिति कर रही विकास कार्य
मंदिर का संरक्षण लंबे समय तक रामनगर राज परिवार के अधीन रहा. वर्ष 1972 में राजा नारायण विक्रम शाह ने इसका पहला व्यापक जीर्णोद्धार कराया. बाद में स्वर्गीय राजा मनोहर विक्रम शाह, प्रेमप्रेमा शाह और मधुकर विक्रम शाह ने मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वर्ष 2002 में मंदिर के संरक्षण और विकास के लिए समिति का गठन किया गया, जिसके माध्यम से समय-समय पर विकास कार्य कराए जा रहे हैं.
भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक से भक्तिमय हो उठता है परिसर
सावन के दौरान मंदिर परिसर सुबह से देर शाम तक रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, भजन-कीर्तन और विशेष पूजन से भक्तिमय बना रहता है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बाबा नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. यही कारण है कि सावन शुरू होते ही यह ऐतिहासिक शिवालय लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है.
