Bagaha News: बगहा. धनहा थाना क्षेत्र में धारदार हथियार गड़ासा से हमला कर 85 वर्षीय वृद्ध लक्ष्मी यादव की हत्या के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया. अदालत ने मामले में अभियुक्त सकलदेव यादव को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी. इसके साथ ही उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा.
गड़ासा से हमला कर वृद्ध को किया गया था गंभीर घायल
मामला धनहा थाना कांड संख्या 105/23 से संबंधित है. मृतक लक्ष्मी यादव के पुत्र नरेश यादव के बयान पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि सकलदेव यादव ने धारदार हथियार गड़ासा से लक्ष्मी यादव पर जानलेवा हमला किया था. हमले में वृद्ध के सिर पर गंभीर चोट आयी थी और दाहिने हाथ की एक उंगली भी कट गयी थी.
इलाज के दौरान अस्पताल में हुई थी लक्ष्मी यादव की मौत
गंभीर रूप से घायल लक्ष्मी यादव को परिजन इलाज के लिए अस्पताल लेकर गये थे. वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी. घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया, जिसके बाद मामले का न्यायिक विचारण शुरू हुआ.
नौ गवाहों की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों पर हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से घटना को साबित करने के लिए कुल नौ साक्षियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया. अभियोजन ने साक्षियों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त पर लगाये गये आरोपों को प्रमाणित करने का प्रयास किया.
साक्ष्यों के आधार पर सकलदेव को हत्या का दोषी पाया
अपर लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने सकलदेव यादव को हत्या का दोषी पाया. इसके बाद न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनायी और एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया.
जुर्माना नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त सजा
अदालत के आदेश के अनुसार एक लाख रुपये का अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में सकलदेव यादव को छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा. अभियोजन पक्ष ने फैसले को गंभीर अपराध के मामले में न्याय की जीत बताया है. अभियोजन के अनुसार, सकलदेव यादव का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है.
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