वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में मिला दुर्लभ 'Salazar Pit Viper', पहली बार दिखी जहरीले सांप की यह प्रजाति

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पहली बार दुर्लभ Salazar Pit Viper सांप मिलने से वन्यजीव विशेषज्ञ उत्साहित हैं. यह खोज क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र की पुष्टि करती है.

वाल्मीकिनगर से विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट

वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व: बिहार के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है. वीटीआर से सटे वाल्मीकिनगर क्षेत्र में दुर्लभ प्रजाति के 'सालाजार पिट वाइपर (Salazar Pit Viper)' की मौजूदगी दर्ज की गई है. वन्यजीव विशेषज्ञ इसे रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं. इस दुर्लभ सांप की पहचान से वीटीआर की जैविक संपदा में एक और अहम उपलब्धि जुड़ गई है.

दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित ठिकाना है VTR

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पहले से बाघ, तेंदुआ, गौर, भालू, घड़ियाल, सैकड़ों पक्षी प्रजातियों और कई दुर्लभ सरीसृपों का सुरक्षित आवास माना जाता है. अब सालाजार पिट वाइपर की मौजूदगी ने यह साबित किया है कि यहां का जंगल आज भी कई दुर्लभ जीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास बना हुआ है.

क्या है सालाजार पिट वाइपर की खासियत?

वन्यजीव विशेषज्ञ अभिषेक के अनुसार, यह सांप हरे रंग का होता है, जिसमें हल्की सुनहरी आभा दिखाई देती है. यह सामान्य ग्रीन पिट वाइपर से अलग नजर आता है. हालांकि यह विषैला होता है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका विष अपेक्षाकृत कम प्रभावी माना जाता है.

इस प्रजाति की सबसे बड़ी पहचान इसकी आंख और नाक के बीच मौजूद 'पिट' नामक ताप-संवेदनशील अंग है. यह अंग अंधेरे में भी शिकार के शरीर से निकलने वाली ऊष्मा को पहचानने में मदद करता है, जिससे यह बेहद सटीक तरीके से शिकार कर पाता है.

हैरी पॉटर के किरदार से जुड़ा है नाम

इस दुर्लभ प्रजाति की पहली वैज्ञानिक पहचान वर्ष 2019 में अरुणाचल प्रदेश में हुई थी. वैज्ञानिकों ने इसका वैज्ञानिक नाम 'Trimeresurus salazar' रखा, जो प्रसिद्ध फिल्म 'हैरी पॉटर' के चर्चित पात्र सलाजार स्लीथेरिन (Salazar Slytherin) से प्रेरित है. इसी वजह से यह सांप दुनियाभर में 'सालाजार पिट वाइपर' के नाम से जाना जाता है.

वन विभाग ने जारी की अपील

विशेषज्ञों का मानना है कि वाल्मीकिनगर में इस दुर्लभ प्रजाति का मिलना वन संरक्षण की सफलता का संकेत है. वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि यह सांप कहीं दिखाई दे तो उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें, उसे किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत विभाग को सूचना दें, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक आवास में संरक्षित किया जा सके.

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