तीसरी सोमवारी का दिखा अद्भुत नजारा, 62 किमी चलकर पहुंचे कांवड़िए और उमड़े 1 लाख श्रद्धालु

पश्चिम चंपारण के रामनगर में श्रावण की तीसरी सोमवारी पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. ऐतिहासिक श्री नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव राज शिव मंदिर में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की. वाल्मीकिनगर से 62 किमी की पदयात्रा कर पहुंचे कांवड़ियों की सेवा में स्वयंसेवक जुटे रहे.

West Champaran News: श्रावण की तीसरी सोमवारी पर रामनगर का ऐतिहासिक श्री नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव राज शिव मंदिर आस्था और भक्ति का विशाल केंद्र बन गया. सोमवार को अहले सुबह से देर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा. अनुमान के मुताबिक एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा नर्मदेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना की. पूरे दिन मंदिर परिसर और आसपास का इलाका "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से गूंजता रहा.

Ramnagar News: 62 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे कांवड़िए

वाल्मीकिनगर त्रिवेणी संगम से पवित्र जल लेकर कांवड़िए और पिठ्ठू बम करीब 62 किलोमीटर की पदयात्रा कर रामनगर पहुंचे. रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था.

बड़ी संख्या में कांवड़ियों के सबुनी माई स्थान पहुंचने पर सभापति प्रतिनिधि नागेंद्र साह और सुजल सिंह के प्रयास से सम्राट अशोक भवन का गेट खोलकर श्रद्धालुओं के ठहरने और विश्राम की व्यवस्था कराई गई. यहां श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं.

तीन बजे से पहले खुला मंदिर का पट

तीसरी सोमवारी को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर का पट अहले सुबह तीन बजे से पहले ही खोल दिया गया. इसके बाद जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक लगातार चलता रहा.

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुजारी अमित कुमार उपाध्याय और ईश्वर भगत के निर्देशन में पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई.

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम

भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए थानाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार और पुलिस इंस्पेक्टर योगेन्द्र रविदास के नेतृत्व में पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मी और जवान तैनात रहे. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी से निगरानी की गई.

बैरिकेडिंग कर प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी नहीं हुई.

सेवा में जुटे स्वयंसेवक, बारिश के बावजूद नहीं डिगी आस्था

व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में संकीर्तन संघ के समाजसेवी सह शिक्षक संदीप मिश्र, राकेश सिंह राजपूत, राजेश तुलस्यान, भुवनेश्वर सिंह, टुन्ना यादव, संतोष विक्रम शाह, विनय श्रीवास्तव, आनंद सिंह, मुन्ना गोड, रंजन गुप्ता समेत कई स्वयंसेवकों ने सक्रिय योगदान दिया.

बारिश के कारण मेले की रौनक कुछ फीकी जरूर रही, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह पर इसका कोई असर नहीं पड़ा.

147 साल पुराना है राज शिव मंदिर

मंदिर के पुजारी अमित कुमार उपाध्याय ने बताया कि करीब 147 वर्ष पुराना राज शिव मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है. सावन में दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा नर्मदेश्वर का जलाभिषेक करते हैं.

सभापति प्रतिनिधि नागेंद्र साह ने कहा कि वाल्मीकिनगर से आने वाले कांवड़ यात्रियों और बोल बम श्रद्धालुओं की सेवा करना सौभाग्य की बात है. श्रद्धालुओं के विश्राम और सुविधा को ध्यान में रखते हुए अशोक भवन में व्यवस्था कराई गई. उन्होंने बाबा भोलेनाथ से सभी कांवड़ यात्रियों की मंगलमय यात्रा और सुख-समृद्धि की कामना की.

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By Prabhat khabar news desk

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