West Champaran News: श्रावण मास में शिवभक्तों की आस्था पर प्रशासनिक ताला भारी पड़ता नजर आ रहा है. गंडक नदी के संगम तट स्थित प्रसिद्ध बाबा कौलेश्वर मंदिर तक जाने वाला मुख्य पाथवे पिछले करीब तीन वर्षों से बंद है, जिससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को करीब दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. इससे कांवड़ियों, बुजुर्गों और महिला श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
Valmikinagar News: मुख्य पाथवे बंद होने से बढ़ी परेशानी
गंडक नदी किनारे बना यह पाथवे बाबा कौलेश्वर मंदिर और जटाशंकर धाम तक पहुंचने का सबसे सुगम मार्ग माना जाता है. लेकिन जल संसाधन विभाग द्वारा मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगाए जाने से श्रद्धालुओं का आवागमन बाधित है. वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद उसकी दूरी अधिक होने के कारण श्रद्धालुओं को अतिरिक्त पैदल चलना पड़ रहा है.
श्रावण में श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें
श्रावण मास में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम तट से जल भरकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने मंदिर पहुंचते हैं. ऐसे समय में मुख्य मार्ग बंद रहने से कई श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ श्रद्धालु लंबी दूरी और असुविधा के कारण वापस लौटने को भी मजबूर हो जाते हैं.
उप मुखिया ने गेट खोलने की मांग की
वाल्मीकिनगर पंचायत के उप मुखिया रवि प्रकाश ने जल संसाधन विभाग की अधीक्षण अभियंता से श्रावण मास के दौरान कम-से-कम एक माह के लिए मुख्य गेट खोलने की मांग की है. उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दोपहिया वाहन एवं ई-रिक्शा के परिचालन की अनुमति देने का भी आग्रह किया है, जिससे श्रद्धालुओं को राहत मिलने के साथ स्थानीय ई-रिक्शा चालकों को भी रोजगार मिल सके.
विभाग के निर्णय का इंतजार
स्थानीय नागरिकों और शिवभक्तों ने भी प्रशासन से शीघ्र मुख्य गेट खोलने की मांग की है. उनका कहना है कि श्रावण माह में यह निर्णय हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा. अब सभी की नजरें जल संसाधन विभाग के निर्णय पर टिकी हैं.
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