Highway Connectivity: पश्चिम चंपारण को उत्तर प्रदेश से सीधे जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी एनएच-727एए परियोजना के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया तेज कर दी गयी है. पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का काम पूरा करने के लिए अधिकारियों को साढ़े तीन माह की समयसीमा दी है. डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित अवधि में भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही जिन मौजों में जमीन को लेकर आपत्तियां लंबित हैं, उनका भी शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश दिया है. प्रशासन की ओर से भू-अर्जन की बाधाओं को दूर कर परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ करने पर जोर दिया जा रहा है.
29.24 किमी की है यह परियोजना, बिहार के 16 गांव शामिल
एनएच-727एए बेतिया के मनुआपुल से शुरू होकर पटजिरवा, पिपराघाट होते हुए गंडक नदी को पार कर उत्तर प्रदेश के सेवरही क्षेत्र में तिवारीपट्टी तक जायेगा. पूरे कॉरिडोर की लंबाई करीब 29.24 किलोमीटर है. यह सड़क पश्चिम चंपारण को सीधे पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ेगी. परियोजना के लिए पश्चिम चंपारण में करीब 160.93 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. इसमें 16 गांवों के रैयतों की जमीन शामिल है.
80 फीसदी भू-अर्जन के बाद निर्माण को मिलेगी रफ्तार
एनएच-727एए के निर्माण के लिए कम से कम 80 फीसदी भू-अर्जन पूरा होना जरूरी है. ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से साढ़े तीन माह की समयसीमा तय किया जाना परियोजना के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जिन मौजों में रैयतों की आपत्तियां हैं, वहां संबंधित अधिकारियों को उनका निपटारा करने का निर्देश दिया गया है. जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण एजेंसी के लिए परियोजना के काम को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा.
गंडक पर बनेगा 11.24 किमी लंबा पुल
एनएच-727एए की सबसे बड़ी खासियत गंडक नदी पर प्रस्तावित करीब 11.24 किलोमीटर लंबा पुल है. पुल के साथ दोनों तरफ एप्रोच रोड भी विकसित की जायेगी. प्रस्तावित पुल पटजिरवा से ठकराहा के जीन बाबा स्थान के बीच गंडक नदी पर बनाया जाना है. यह पुल बेतिया और उत्तर प्रदेश के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा. करीब 11.24 किलोमीटर लंबाई के कारण यह पुल बनने के बाद बिहार के सबसे लंबे नदी पुल के रूप में नया रिकॉर्ड बना सकता है.
3294.16 करोड़ रुपये की है पूरी परियोजना
एनएच-727एए परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3294.16 करोड़ रुपये है. इसके तहत मनुआपुल से तिवारीपट्टी तक सड़क के निर्माण के साथ गंडक नदी पर पुल, एप्रोच रोड और आवश्यक अन्य संरचनाओं का निर्माण किया जाना है. परियोजना पूरी होने पर पश्चिम चंपारण के लोगों को उत्तर प्रदेश जाने के लिए नया और सीधा मार्ग मिलेगा.
160 किमी के चक्कर से मिलेगी मुक्ति
गंडक पर इस हिस्से में सीधा पुल नहीं होने के कारण बेतिया से सेवरही की ओर जाने में लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है. मौजूदा मार्ग से यह दूरी करीब 160 किलोमीटर तक पड़ती है. एनएच-727एए और गंडक पुल बनने के बाद बेतिया से सेवरही की दूरी करीब 21 किलोमीटर रह जाने की उम्मीद है. इससे यात्रा का समय और दूरी दोनों काफी कम होंगे.
व्यापार और पर्यटन को मिलेगा फायदा
नया हाईवे बनने से बेतिया के साथ बैरिया, पटजिरवा, पिपराघाट, ठकराहा और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी. वहीं उत्तर प्रदेश के सेवरही और तमकुहीराज क्षेत्र से पश्चिम चंपारण का सीधा संपर्क बनेगा. इससे स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों की आवाजाही और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. पश्चिम चंपारण के लिए यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जिले को पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े बाजारों से जोड़ने वाला वैकल्पिक और छोटा मार्ग उपलब्ध करायेगी.
अब जमीन पर काम आगे बढ़ाने की तैयारी
परियोजना की मौजूदा स्थिति में सबसे अहम चुनौती भू-अर्जन है. डीएम तरनजोत सिंह की ओर से साढ़े तीन माह की समयसीमा तय किये जाने के बाद अब संबंधित विभागों के सामने निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी है. 160.93 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण और लंबित आपत्तियों के निस्तारण के बाद परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा. ऐसे में अगले साढ़े तीन माह एनएच-727एए के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.
