बेतिया: एमजेके कॉलेज के 72वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में पीजी भूगोल विभाग और बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पीजी भूगोल विभाग के संयुक्त सहयोग से आयोजित छह दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला का समापन गुरुवार देर शाम हुआ. तीन से 10 सितंबर तक चली इस श्रृंखला में भूगोल के अध्ययन के बदलते स्वरूप और इससे जुड़े उभरते क्षेत्रों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे.
अंतरिक्ष विज्ञान से जियो-एआई तक विषयों पर चर्चा
व्याख्यान श्रृंखला की विषय-वस्तु पारंपरिक भौगोलिक अवधारणाओं तक सीमित न रहकर अंतरिक्ष विज्ञान, वैश्विक नागरिकता, जियो-एआई, शोध नैतिकता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़ी रही.
छह दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान दिये. प्रो. बीएस चौधरी ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा और गगनयान, अमेरिका की प्रो. सैली स्टाइन्डॉर्फ ने वैश्विक नागरिकता, प्रो. बाला सेल्व कुमार एस. ने अपराध के स्थानिक विश्लेषण में जियो-एआई, डॉ. उदय चटर्जी ने शोध-पत्र प्रकाशन एवं शोध नैतिकता तथा डॉ. मोहम्मद अफाक अली ने भूगोल में एआई, जेनरेटिव एआई और एजेंटिक एआई के अनुप्रयोगों पर विमर्श किया.
बदलते स्वरूप और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर विचार
समापन सत्र में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रो. प्रवीण के. पाठक ने भारत में युवाओं के बदलते स्वरूप और उससे जुड़े मुद्दों पर विचार रखे. कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. बरखा चपलोत रहीं.
व्याख्यान श्रृंखला में 180 विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने पंजीकरण कराया.
शोध-अभिरुचि विकसित करने में सहायक ऐसे संवाद
प्राचार्य प्रो. (डॉ.) नवल किशोर बैठा ने कहा कि वर्तमान समय में भूगोल का क्षेत्र तेजी से विस्तार पा रहा है और तकनीकी विकास ने इसके अध्ययन एवं शोध के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं. ऐसे अकादमिक संवाद विद्यार्थियों में शोध-अभिरुचि विकसित करने, नये विचारों से परिचित कराने तथा विषय को व्यापक और समकालीन परिप्रेक्ष्य में समझने में सहायक होते हैं.
आयोजन की सफलता में सह संयोजक डॉ. तृप्ति कुमारी एवं आयोजन सचिव डॉ. योगेंद्र सम्यक की महत्वपूर्ण भागीदारी रही. व्याख्यान श्रृंखला में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों के साथ डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. प्रेम कुमार, डॉ. जितेश, डॉ. एषा जमाल, डॉ. शीरीं हयात और डॉ. इन्द्राणी रॉय की भी महत्वपूर्ण सहभागिता रही.
