Bettiah News: पश्चिम चम्पारण में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत पुनर्जीवित किए गए अमृत सरोवर अब ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का नया आधार बनने जा रहे हैं. जिले के 75 अमृत सरोवरों को जीविका समूहों से जोड़कर मछली उत्पादन शुरू कराने की तैयारी तेज हो गई है. इसके लिए विभागीय स्तर पर सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है. इसे ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है.
एक सप्ताह में मांगी गई सर्वे रिपोर्ट
तालाबों की वर्तमान स्थिति, जल उपलब्धता और मत्स्य उत्पादन की संभावनाओं का आकलन करने के लिए सर्वे किया जा रहा है. राष्ट्रीय नियोजन कार्यक्रम, पश्चिम चम्पारण के निदेशक पुरुषोत्तम त्रिवेदी ने बताया कि जिले के सभी प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सर्वे रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. रिपोर्ट के आधार पर ऐसे तालाबों का चयन होगा, जहाँ जीविका समूहों के जरिए संगठित तरीके से मछली पालन कराया जा सके.
रोजगार और जल संरक्षण का संगम
सरकार की मंशा जल संरक्षण को सीधे ग्रामीणों की आय से जोड़ने की है. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित होगा. इस योजना का सबसे अधिक लाभ गरीब परिवारों और ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा. वर्षों से उपेक्षित पड़े तालाबों के कायाकल्प के बाद अब गांवों में रोजगार की नई उम्मीद जगी है.
आत्मनिर्भर बनेंगी ग्रामीण महिलाएं
जीविका समूह की महिलाओं का कहना है कि यदि उन्हें उचित प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिले, तो वे मछली उत्पादन से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं. यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर पलायन रोकने में भी मददगार साबित होगी. अब पश्चिम चंपारण के ये अमृत सरोवर महिला सशक्तिकरण और स्थानीय रोजगार का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहे हैं.
बेतिया से अवध किशोर तिवारी की रिपोर्ट
