वाल्मीकिनगर रेलखंड पर ट्रेन की चपेट में आया भालू, दो घंटे ठप रहा रेल परिचालन

वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सोमवार तड़के एक नर भालू की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई. इस हादसे के कारण वाल्मीकिनगर-पनियहवा रेलखंड पर करीब दो घंटे तक रेल परिचालन बाधित रहा, जिससे कई ट्रेनें रुकी रहीं. घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.

Valmikinagar News: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) क्षेत्र में सोमवार तड़के एक जंगली नर भालू की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई. हादसा मदनपुर वन प्रक्षेत्र के जंगल से होकर गुजरने वाले नरकटियागंज-गोरखपुर रेलखंड पर वाल्मीकिनगर और पनियहवा रेलवे स्टेशन के बीच अड़गना टोला पुल (पुल संख्या-357) के समीप हुआ. घटना के बाद करीब दो घंटे तक रेल परिचालन प्रभावित रहा.

वन विभाग ने कराया पोस्टमार्टम

घटना की सूचना मिलते ही मदनपुर वन प्रक्षेत्र के वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. आवश्यक कार्रवाई के बाद मृत भालू के शव को मदनपुर वन विश्रामालय लाया गया, जहां पशु चिकित्सक डॉ. संजीव रंजन की देखरेख में पोस्टमार्टम कराया गया. इसके बाद वन विभाग ने नियमानुसार शव का अंतिम निस्तारण कर दिया.

वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी नसीम अहमद अंसारी ने बताया कि सूचना मिलते ही वनपाल राजेश रौशन और वनरक्षी सुजीत पासवान के नेतृत्व में टीम को घटनास्थल भेजा गया. प्रारंभिक जांच में भालू की मौत ट्रेन की चपेट में आने से होने की पुष्टि हुई है.

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दो घंटे तक प्रभावित रहा रेल परिचालन

हादसे के बाद वाल्मीकिनगर-पनियहवा रेलखंड पर करीब दो घंटे तक रेल परिचालन प्रभावित रहा. इस दौरान वंदे भारत एक्सप्रेस, अंत्योदय एक्सप्रेस, सप्तक्रांति एक्सप्रेस और सवारी गाड़ी सहित कई ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर रोकना पड़ा. वन विभाग की कार्रवाई पूरी होने के बाद रेल परिचालन सामान्य कराया गया.

किस ट्रेन से हुआ हादसा, जांच जारी

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक सह क्षेत्र निदेशक गौरव ओझा ने बताया कि भालू किस ट्रेन की चपेट में आया और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जांच की जा रही है. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जाएंगे.

वन्यजीव सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

वीटीआर क्षेत्र में ट्रेन की चपेट में भालू की मौत के बाद एक बार फिर रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. जंगल से होकर गुजरने वाले इस रेलखंड पर पहले भी कई वन्यजीव ट्रेन हादसों का शिकार हो चुके हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीवों की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रेनों की गति सीमित करने, सतत निगरानी बढ़ाने और रेलवे तथा वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है.


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By Jay prakash verma

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