begusarai news : तपोभूमि में परिणत हुआ सिमरिया घाट का संपूर्ण इलाका

begusarai news : धूप व अगरबत्ती के सुगंध से सुवासित हो रहा वातावरणपर्णकुटीर में अरवा चावल, चने की दाल व कद्दू की सब्जी का बन रहा महाप्रसाद

बीहट. सिमरिया घाट का संपूर्ण इलाका तपोभूमि में परिणत है. धूप, अगरबत्ती के सुगंध से वातावरण सुवासित हो रहा है. अहले सुबह से ही कल्पवासियों का आध्यात्मिक जीवन शुरू हो जाता है. संतों व विभिन्न खालसा धारियों के पंडालों से प्रवचन और कीर्तन के स्वर फूटने लगते हैं. पंडालों के भीतर श्रद्धालुओं को अध्यात्म का चरम आनंद और संस्कृति दर्शन व परंपरा का साकार रूप एक साथ देखने-सुनने को मिल रहा है. गंगा तट पर कई वैदिक-लौकिक अनुष्ठानों को देखना अद्भुत व अलौकिक है.

कल्पवासियों के पर्ण कुटिया में बनता है स्वादिष्ट महाप्रसाद

अहले सुबह गंगा स्नान करने के बाद कल्पवासी अपने-अपने पर्णकुटीर में मिट्टी के बने चूल्हे पर महाप्रसाद बनाने में जुट जाते हैं. लोगों का मानना है कि कल्पवासियों के पर्णकुटीर में बड़ा ही स्वादिष्ट महाप्रसाद बनता है. इस पर्णकुटीर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां जो भी लोग आ जाते हैं वह बगैर महाप्रसाद के नहीं लौटते. अरवा चावल का भात, चने की दाल एवं कद्दू की सब्जी अधिसंख्य कल्पवासियों के पर्णकुटीर में तैयार की जाती है. रात्रि में फिर कल्पवासी रोटी व साग बनाकर खाते हैं और पर्णकुटीर तक पहुंचनेवाले लोगों को भी यहां से भूखे लौटने नहीं देते. बड़ा ही अद्भुत दृश्य इन दिनों प्रसिद्ध सिमरिया घाट में देखने को मिल रहा है.

अक्षय नवमी को लेकर सर्वमंगला आश्रम में उमड़ी भीड़

अक्षय नवमी पर गुरुवार को सर्वमंगला के ज्ञानमंच परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ कार्तिक महात्म्य और भागवत कथा प्रवचन सुनने के लिए उमड़ पड़ी. स्वामी चिदात्मनजी महाराज ने कहा कि इस समय वैवस्वत मन्वंतर के 28वें कलयुग में सतयुग का उत्सव मना रहे हैं. सतयुग का प्राकट्य पुनीत कार्तिक माह के अक्षय नवमी तिथि को ही हुआ था. इस प्रकार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष के तृतीया को जिसे हम अक्षय तृतीया के नाम से जानते हैं उस दिन से त्रेता युग का आरंभ होता है. उन्होंने कहा वर्ष के दो अनुपम अक्षय नवमी और अक्षय तृतीया के दिन जो लोक कर्म होता है, वह अक्षय हो जाता है. अक्षय नवमी को सतयुग का प्राकट्य माना जाता है. सतयुग में धर्म के चारों चरण अवस्थित होते हैं. अक्षय नवमी को धात्री (आंवला) जो सरस्वती के बीज से प्रकट हुई हैं, उसका महत्व सर्वोपरि कहा गया है. धात्री के नीचे ब्रह्मांड का प्रतीक कुष्मांडा गुप्त दान के साथ दान किया जाता है. सौभाग्यवती मां-बहन कच्चा धागा से सूत्र का फेरा देती हैं तथा चारों पदार्थ का भागी बनती हैं. वृक्ष के नजदीक भोजन करने से गुणात्मक वृद्धि होती है तथा आरोग्यता की प्राप्ति होती है. दीर्घ जीवन की प्राप्ति होती है. वृक्ष नहीं उपलब्ध रहने पर धात्री का पत्ता या फल भी डाल कर लोग भोजन करते हैं. मोक्ष दायिनी नदियों में सर्वोपरि मां गंगा के किनारे अगर ऐसा सौभाग्य प्राप्त हो, तो उनके महत्व का कोई वर्णन नहीं कर सकता.

रिमझिम फुहारों के बीच आरंभ हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम

सिमरियाधाम में चल रहे राजकीय कल्पवास मेले की सांस्कृतिक संध्या में बुधवार को साकार कलाकृति, पटना के कलाकारों द्वारा लोक नृत्य की शानदार प्रस्तुति से श्रद्धालु अभिभूत हुए. बिहार गौरव गाथा के माध्यम से कलाकारों ने बिहार की सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झांकी की प्रस्तुति दी. कलाकारों में सोनाली सरकार, प्रतीक्षा रानी, तनु कुमारी, संध्या कुमारी, प्राची कुमारी, अजीत कुमार, विवेक कुमार ने झिझिया, झूमर, कजरी, सामा चकेवा, जट-जटिन, विवाह भाव नृत्य आदि की बेहतरीन प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी. छठ गीत व सामा चकेवा के गीत पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया. मौके पर उपस्थित जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने कलाकारों को सम्मानित किया. मंच व्यवस्था एवं उद्घोषणा में रामसुंदर गांधी ने तथा मनोज सहयोगी के रूप में अपनी सक्रिय भूमिका निभायी.

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Published by: Shailesh kumar

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