खोदावंदपुर. खोदावंदपुर प्रखंड क्षेत्र के सागी पंचायत में लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भारत नीर निर्मल परियोजना से नुरुल्लाहपुर गांव में वर्ष 2017 में पानी के टावर का निर्माण कार्य शुरू किया, जो कोरोना काल के बाद वर्ष 2021 में बनकर तैयार हुआ. इस पानी टावर से पंचायत के एक से छह वार्ड तक सभी परिवारों को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति किये जाने की योजना थी, परंतु पानी टावर से घर-घर पाइपलाइन जोड़ने के कार्य में ठेकेदार एवं उसके कर्मियों की मनमानी कार्यशैली से कई घरों तक पानी की पाइप नहीं पहुंची. इन वार्डों में मात्र 40 से 50 घरों तक ही पानी का पाइप कनेक्शन पहुंचा, जिसका नतीजा है कि नुरूल्लाहपुर गांव के अधिकतर घरों तक पेयजल योजना आज तक नहीं पहुंची है. पेयजल योजना के लाभ से वंचित ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत सरकार के टॉल फ्री नंबर 155367 पर कई बार की गयी है, परंतु इस समस्या का निराकरण नहीं हो रहा है. गर्मी के दस्तक के साथ ही भूगर्भ जल स्तर नीचे चले जाने से चापाकलों की स्थिति खराब है. चापाकलों ने जवाब देना शुरू कर दिया है, जिससे लोगों का हाल खस्ता है. ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी जनता की सुधि लेने के बजाय संवेदक से मिलीभगत कर बधिर और मूकदर्शक बने हुए हैं. आयरन युक्त पानी पीने के लिए विवश हैं ग्रामीण : जानकार लोगों की मानें तो सरकार की इस महत्वपूर्ण परियोजना के द्वारा वर्ष 2022 तक ही सभी लोगों को स्वच्छ जल उनके घर तक पहुंचाने की योजना थी, परंतु ऐसा नहीं हुआ. आज भी नुरूल्लाहपुर गांव के अधिकतर लोग अत्यधिक आयरन युक्त पानी पीने के लिए लाचार हो रहे हैं. विभाग के ठेकेदार की लापरवाही और मनमानी के कारण सरकार व विश्व बैंक की महत्वाकांक्षी योजना खटाई में पड़ गयी है. जांच पड़ताल के नाम पर हुई खानापूर्ति : ग्रामीणों का कहना है कि जब विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गयी तो बीडीओ साहब आये और पानी टावर के पास फोटो खिंचवाकर चले गये. समस्या का निराकरण नहीं की गयी. जांच के नाम पर महज खानापूर्ति की गयी. ग्रामीणों का कहना है कि समय-समय पर विभागीय अधिकारी इस योजना स्थल पर आते हैं और जनसमस्या सुनने की बजाय संवेदक से मेलजोल कर लेते हैं और फिर चले जाते हैं, जिसके कारण अब यहां के लोगों ने समस्या के निराकरण की आशा छोड़ ही दिया है. ग्रामीणों की शिकायत : नुरूल्लाहपुर के ग्रामीणों ने बताया कि जलमीनार बनने के साथ ही लीकेज हो गया और उससे पानी रिसने लगा. लिकेज टंकी की मरम्मत आज तक नहीं की गयी है. पानी का फिल्टर भी नहीं किया जाता. करीब 1000 की आबादी वाले इस गांव में महज 40 से 50 घरों तक ही पेयजलापूर्ति का कार्य किया जा रहा है, जिसके कारण सरकार की नल जल योजना धरातल पर दम तोड़ रही है. प्रभात खबर आपके द्वार अभियान के तहत जब धरातल पर इसकी खोज खबर ली गयी तो सच कुछ और ही सामने आया. कहते हैं सामाजिक कार्यकर्ता भारत सरकार की नीर निर्मल परियोजना जनहितकारी योजना है, परंतु विभाग के अधिकारियों की उदासीनता से लोगों को इसका उचित लाभ नहीं मिलता. संतोष कुमार दास, सामाजिक कार्यकर्ता, दौलतपुर पानी सभी लोगों के लिए जरूरी है. सरकार ने पेयजल के लिए व्यवस्था भी किया है, परंतु पेयजलापूर्ति के लिए संसाधनों की कमी से यह योजना सफलीभूत नहीं हो रही. असीम आनंद, सामाजिक कार्यकर्ता, नुरुल्लाहपुर सागी पंचायत के नुरूल्लाहपुर गांव में लौह युक्त पानी मिल रहा है, जिसकी जांच पड़ताल की जरूरत है. लोगों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था होनी चाहिए. जियाउर रहमान उर्फ सैफी, प्रखंड राजद अध्यक्ष, खोदावंदपुर हर घर नल का जल पहुंचाने की व्यवस्था नहीं होने से अधिकतर लोग शुद्ध पेयजल से वंचित हैं. आयरन युक्त पानी पीने से बीमारी बढ़ रही है. कैलाश कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता, बरियारपुर पूर्वी केंद्र सरकार की नीर निर्मल परियोजना में संवेदक की लापरवाही से लोगों को नहीं मिल रहा शुद्ध पेयजल. हर घर को पानी टावर से पाइप कनेक्शन करने की जरूरत है. जुनैद अहमद उर्फ राजू, पंसस, खोदावंदपुर नुरूल्लाहपुर के गरीब परिवारों तक नहीं पहुंची है नल जल योजना. गर्मी के दस्तक के साथ ही पेयजल किल्लत शुरू. अशोक कुमार रजक, सामाजिक कार्यकर्ता नुरूल्लाहपुर गांव में बनाये गये पानी टावर में लिंकिंग रहने से इसमें पानी जमा नहीं होता है. इसे अविलंब दुरुस्त करने की जरूरत है. राजकुमार, सामाजिक कार्यकर्ता भारत नीर निर्मल परियोजना में सरकारी राजस्व की लूट मचायी गयी. संवेदक व अधिकारी की मिलीभगत का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. इसकी उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है. पंकज कुमा, सामाजिक कार्यकर्ता शुद्ध पेयजल मिलने की नुरूल्लाहपुर के ग्रामीणों का सपना अब तक अधूरा है. अधिकतर परिवारों तक नहीं पहुंचा पानी कनेक्शन का पाइप. संतोष कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता दलित, अत्यंत पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक बाहुल्य नुरूल्लाहपुर गांव में नल जल योजना की स्थिति बदतर. पीने का नहीं मिल रहा पानी. अधिकारी हैं मौन. राम विनोद महतो, इस्मैला सागी
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