जगदीश मित्तल बाबू की स्मृति में बरौनी में श्रद्धांजलि सभा, कवियों ने साहित्य में उनके योगदान को किया याद

राष्ट्रीय कवि संगम ने बेगूसराय में स्मृतिशेष जगदीश मित्तल बाबू की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की. साहित्य जगत ने उनके योगदान और समर्पण को भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ याद किया. उपस्थित कवियों और वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डाला.

Begusarai News : राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्मृतिशेष जगदीश मित्तल बाबू की स्मृति में जिला इकाई बेगूसराय द्वारा मदर टेरेसा एकेडमी, शोकहरा, बरौनी में अंतर्राष्ट्रीय कवि डॉ. शैलेंद्र शर्मा त्यागी की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया.

इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व, कृतित्व एवं साहित्य तथा राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को स्मरण करते हुए गणमान्य कवियों, अभिभावकों और छात्र एवं छात्राओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किए.

कवियों और वक्ताओं के विचार

ख्याति प्राप्त कवि डॉ. शैलेंद्र शर्मा त्यागी ने कहा कि बाहर तो दीप बहुत जले अन्तर का दीप जलाना है, आडम्बर की दीप शिखा से तम का क्षय नहीं होने वाला है. राष्ट्रीय कवि संगम के प्रांतीय अध्यक्ष प्रभाकर कुमार राय ने कहा कि प्रेरणास्त्रोत आदरणीय स्मृतिशेष जगदीश मित्तल जी का अचानक हमलोगों के बीच से जाना साहित्य जगत के लिए अपूर्णीय क्षति हुई है.

हमलोगों ने एक अनमोल रत्न खो दिया. कवि प्रफुल्ल चन्द्र मिश्र ने कहा कि है सफल बस वही ये कहता है, प्रफुल्ल, जिसका जाना ज़माने को खल जाएगा. जिंदगी में कभी भी वो पल आएगा, छोड़ इस जहां को तू निकल जाएगा.

कवि विद्यासागर ब्रह्मचारी ने कहा वाणी के उस वरद पुत्र को, सादर शीश झुकाते हैं. नम आंखों से महा मनुज को श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं. कवि साहित्यकार देवनीति राय ने कहा कि फल लगे वृक्ष झुक जाते हैं. मानव कितना सुख पाते हैं. पर अहंकार जब होता है. मानव तब तो पछताता है.

योगदान और संस्मरण

भाजपा के जिला प्रवक्ता सुमन चौधरी ने कहा कि देश के धरोहर थे मित्तल जिन्होंने निःस्वार्थ भावना से देश की सेवा के लिए अपनी सारी संपत्ति के साथ साथ अपने शरीर के एक एक अंग को मेडिकल कॉलेजों को दान देने वाले महापुरुष को श्रद्धांजलि देने के बाद मेरे हृदय से एक ही शब्द आयेगा कि बाबू जी अपने साहित्यकारों को आशीष की छाया में सदैव रखें.

राष्ट्रीय कवि संगम के जिलाध्यक्ष बृज बिहारी मिश्र ने कहा स्मृतिशेष जगदीश मित्तल बाबू ने साहित्य जगत में सैकड़ों नवोदित कवियों को दस्तक के माध्यम से सृजन कर वट वृक्षों की तरह कवियों को देश विदेश में स्थापित कर जीविकोपार्जन का साधन बना दिए. उनके गुजर जाने के बाद साहित्य जगत शोक में डूबा है.

बाबूजी कहते थे जबतक चलते है थकते नहीं रुकते ही थकान महसूस होता है मुसाफिर हूं, साहित्य जगत का उड़ान चाहता हूं. सुधीर कुमार ने कहा कि बाबू जी ने राष्ट्रीय कवि संगम को स्थापित कर छात्र एवं छात्राओं में अलख जगाकर कर साहित्य में रुचि पैदा कर राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने का कार्य किए.

उपस्थित गणमान्य लोग

इस श्रद्धांजलि सभा में सुरेश कुमार राय, धर्मेन्द्र कुमार मिश्र, रंधीर कुमार गुप्ता, उमेश सिन्हा, दिलीप कुमार सिन्हा, सोनाक्षी प्रकाश, सुशील कुमार, श्रेष्ठा राज, आदर्श राज शेखर, रणवीर कुमार, पूजा देवी, रेणु देवी, स्थिति कुमारी, उमंग राज और चंदा देवी सहित कई उपस्थित थे.

साहित्य जगत में शोक

इस आयोजन के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया और उनके द्वारा साहित्य के क्षेत्र में किए गए अमूल्य कार्यों को याद किया.

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By नीरज कुमार

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