मनरेगा बचाओ संग्राम के स्लोगन के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रखा उपवास

रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बचाने और केंद्र सरकार की कथित अनदेखी के विरोध में बेगूसराय जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कांग्रेस नेता व कार्यकर्ताओं ने मुख्यालय स्थित स्वर्ण जयंती पुस्तकालय परिसर में स्थापित महात्मा गांधी के आदम कद प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय उपवास रखा.

बेगूसराय. रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बचाने और केंद्र सरकार की कथित अनदेखी के विरोध में बेगूसराय जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कांग्रेस नेता व कार्यकर्ताओं ने मुख्यालय स्थित स्वर्ण जयंती पुस्तकालय परिसर में स्थापित महात्मा गांधी के आदम कद प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय उपवास रखा. उपवास कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. इस मौके पर रामविलास सिंह, सुबोध कुमार, मुरलीधर मुरारी, सुबोध प्रसाद सिंह,मुकेश कुमार गुड्डू, सुनील सिंह, राजेंद्र पासवान,ब्रजेश कुमार प्रिंस, रामानुज कुंवर,राकेश कुमार, नाज हसन, श्रीराम सिंह, विपिन सिंह, रामजपन सिंह, रणजीत कुमार मुखिया, विक्रम कुमार आदि नेताओं ने संबोधित किया. वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना के बजट में कटौती कर रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पर संकट गहराता जा रहा है. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा है और इसके माध्यम से लाखों परिवारों को रोजगार मिलता है.यदि इस योजना को कमजोर किया गया तो गांवों में बेरोजगारी और पलायन की समस्या और बढ़ेगी. अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष अभय कुमार सिंह सार्जन ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है. यह प्रतिवर्ष 5-6 करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है, मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करता है, ग्रामीण मजदूरी बढ़ाता है और टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण करता है. इसकी मांग-आधारित संरचना, सुनिश्चित मजदूरी और सीधे बैंक भुगतान की व्यवस्था से विशेष रूप से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित समुदायों को लाभ हुआ है, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्य दिवसों का लगभग 60 प्रतिशत है. नया वीबी ग्राम-जी अधिनियम में इस पूरे ढांचे से एक मौलिक विचलन है यह काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है. निर्णय-प्रक्रिया का केंद्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में करता है. ग्राम सभाओं और पंचायतों को कमजोर करता है. तथा केंद्र के मजदूरी अंशदान को लगभग 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर देता है, जिससे वित्तीय बोझ राज्यों और श्रमिकों पर डाल दिया गया है.बजट-सीमित आवंटन, कृषि के चरम मौसम में कार्य पर प्रतिबंध और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों का कमजोर होना अनिवार्य रूप से रोजगार में कमी, मजदूरों के दमन और ग्रामीण संकट में वृद्धि का कारण बनेगा. कार्यक्रम से महात्मा गांधी के नाम को हटाया जाना भी श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के उन मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास दर्शाता है, जिन पर मनरेगा आधारित है. ग्रामीण आजीविकाओं पर इस गंभीर हमले की गंभीरता को देखते हुए, कांग्रेस कार्यसमिति के निर्णय पर मनरेगा बचाओ संग्राम एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन जारी रहेगा जिससे कि काम के अधिकार की रक्षा की जा सके और मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जा सके.मौके पर श्री सार्जन ने केंद्र सरकार से मनरेगा को पूरी मजबूती के साथ लागू करने और समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मनरेगा को बचाने का संकल्प लिया.

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By Manish kumar

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