संस्कारों की जननी है भागवत कथा : डॉ दुर्गेशाचार्य जी

आज हम संस्कार नहीं कर रहें हैं. फलत: संतति संस्कार विहीन हो रही है.

बेगूसराय. आज हम संस्कार नहीं कर रहें हैं. फलत: संतति संस्कार विहीन हो रही है. दिति ने संध्या के समय गर्भाधान संस्कार विहीन हो पति समागम करने के फलतः हिरण्याक्ष हिरणकश्यपु जैसे महान राक्षसों को जन्म दिया, आज के माता-पिता गर्भाधान आदि संस्कार न कराने से संस्कार विहीन बच्चों को जन्म दे रहे हैं. उक्त बातें शहर के रतनपुर में आयोजित श्रीमदभागवत कथा के दौरान राष्ट्रीय संत डॉ दुर्गेशाचार्य जी महाराज ने कही. उन्होंने कहा कि विवाह संस्कार शॉर्ट कर्ट में होने या प्रेमविवाह होने से आज जितने शीघ्र युवा युवती विवाह कर रहे हैं तो शीघ्र ही उनका तलाक सम्बंध विच्छेद भी हो रहा किंतु भागवत ने कहा अभावों- दुखों में भी सुनीति और कमाधु के भांति ध्रुव एवं प्रहलाद की भांति संस्कारों से गढो. इन माताओं ने जैसे मूर्तिकार पत्थर के टुकडे को तराशकर सुन्दर मूर्ति रूप में पूजनीय योग्य बनाता है. स्वर्णकार सोने को दिव्य आभूषण रुप में बनाकर आपके गले का हार बनाता है. आप भी अपने बच्चों को ऐसे ही तराश कर संस्कारित कर ध्रुव-प्रहलाद की भांति संस्कारित कर इस देश को पुनः विश्व गुरु गरु बनाकर भारत संस्कारों की जननी माता का संस्कार सिद्ध कर विश्व को दिखाएं. यही भागवत कथा का सार है कि आज का युवा संस्कारवान हो. ड्रग्स नशीली वस्तु मादक पदार्थ से दुरव्यसनों से मेरा राष्ट्र मुक्त हो.

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By Manish kumar

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