बेगूसराय संग्रहालय में संरक्षित होंगी सलौना ठाकुरबाड़ी की 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक सिंह प्रतिमाएं, झाड़ियों से हुई थी बरामद

Begusarai News: बेगूसराय जिले के बखरी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक रामजानकी ठाकुरबाड़ी सलौना से करीब 250 वर्ष पुरानी दो प्राचीन सिंह प्रतिमाओं को बेगूसराय संग्रहालय में हस्तांतरित किया गया है. अब इन्हें वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षित कर संग्रहालय की प्रदर्शनी दीर्घा में आम लोगों और शोधार्थियों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा.

Begusarai News: (विकाश मिश्रा की रिपोर्ट) बेगूसराय जिले की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत को सहेजने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल की है. प्रखंड बखरी के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक रामजानकी ठाकुरबाड़ी सलौना से प्राप्त दो बहुमूल्य प्राचीन सिंह प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने और आम जनता के दर्शनार्थ बेगूसराय संग्रहालय में हस्तांतरित कर दिया गया है. पुरातात्विक विशेषज्ञों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, ये दोनों प्रतिमाएं लगभग 250 से 350 वर्ष या उससे भी अधिक प्राचीन हैं. इन कलाकृतियों का सीधा संबंध ठाकुरबाड़ी के मूल निर्माण काल से बताया जा रहा है.

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-सहायक संग्रहालयाध्यक्ष श्याम कुमार सहनी ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए बताया कि रामजानकी ठाकुरबाड़ी, सलौना का निर्माण मुगल काल के उत्तरार्ध में हुआ था. लाल पत्थरों से निर्मित यह ऐतिहासिक धार्मिक स्थल अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला, बेहद बारीक नक्काशी और विशिष्ट स्थापत्य शैली के लिए पूरे उत्तर बिहार में एक विशेष पहचान रखता है. इस भव्य भवन की दीवारों और मेहराबों पर उकेरी गई कलात्मक आकृतियां उस दौर की विकसित मूर्तिकला और स्थापत्य परंपरा की सजीव झलक प्रस्तुत करती हैं.

एक प्रतिमा मिली क्षतिग्रस्त, दूसरी झाड़ियों और मिट्टी के नीचे दबी थी

इस ऐतिहासिक खोज और बरामदगी की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. सहायक संग्रहालयाध्यक्ष श्याम कुमार सहनी ने बताया कि सरकार के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत जिले में पांडुलिपि संरक्षण एवं सांस्कृतिक धरोहरों के दस्तावेजीकरण का कार्य चल रहा है. इसी सिलसिले में उनकी टीम ने रामजानकी ठाकुरबाड़ी परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया था.

निरीक्षण के दौरान टीम को परिसर के एक कोने में एक प्राचीन सिंह प्रतिमा अत्यंत क्षतिग्रस्त और उपेक्षित अवस्था में लावारिस पड़ी मिली. जब इसका प्रारंभिक पुरातात्विक अध्ययन किया गया, तो स्पष्ट हुआ कि यह प्रतिमा कभी ठाकुरबाड़ी के मुख्य शीर्ष भाग पर स्थापित दो सिंह प्रतिमाओं में से एक थी. इसके बाद दूसरी प्रतिमा की खोज के लिए परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया गया. विस्तृत खोजबीन के दौरान ठाकुरबाड़ी परिसर के पिछले हिस्से में झाड़ियों और मिट्टी के नीचे दबी हुई अवस्था में हूबहू वैसी ही दूसरी सिंह प्रतिमा भी बरामद कर ली गई.

वैज्ञानिक पद्धति से होगा संरक्षण, शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए खुलेगी दीर्घा

दोनों दुर्लभ प्रतिमाओं के मिलने के बाद स्थानीय पुलिस-प्रशासन एवं प्रबुद्ध ग्रामीणों के सहयोग से उन्हें सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया. इसके बाद सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच दोनों ऐतिहासिक सिंह प्रतिमाओं को बेगूसराय संग्रहालय पहुंचाया गया.

संग्रहालय में संरक्षण का मास्टर प्लान:

  • वैज्ञानिक कोटिंग: प्रतिमाओं को केमिकल और वैज्ञानिक पद्धति से ट्रीट कर क्षरण से बचाया जाएगा.
  • आधिकारिक प्रलेखन: दोनों प्रतिमाओं का इतिहास, कालखंड और बनावट का लिखित रिकॉर्ड तैयार होगा.
  • विशेष प्रदर्शनी दीर्घा: संग्रहालय की मुख्य गैलरी में इन्हें प्रदर्शित किया जाएगा.

जिला कला एवं संस्कृति विभाग ने इस सफल रेस्क्यू को जिले की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी मील का पत्थर और महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. विभाग का मानना है कि ऐसी ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों का राजकीय संरक्षण न केवल हमारी समृद्ध विरासत को सुरक्षित रखेगा, बल्कि स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, इतिहासकारों, शोधार्थियों और आम नागरिकों को बेगूसराय के गौरवशाली इतिहास, कला और सनातन संस्कृति से रूबरू होने का एक सुनहरा अवसर भी प्रदान करेगा.

Also Read: बिहार में अब एक और परीक्षा रद्द करने की मांग तेज, गांधी मैदान में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Nikhil Anurag

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >