नववर्ष को लेकर बाबा हरिगिरिधाम सज-धज कर तैयार

नव वर्ष 2026 को लेकर हर किसी के मन में ढेर सारी आशाएं और सपने रहते हैं. साल के अंतिम दिन 31 दिसंबर 2024 की मध्य रात्रि में 12:00 बजते ही सन 2025 का आगाज हो जाएगा.

गढ़पुरा. नव वर्ष 2026 को लेकर हर किसी के मन में ढेर सारी आशाएं और सपने रहते हैं. साल के अंतिम दिन 31 दिसंबर 2024 की मध्य रात्रि में 12:00 बजते ही सन 2025 का आगाज हो जाएगा. इससे इतर नववर्ष पर ग्रह गोचरों का शुभ संकेत बन रहा है. गढ़पुरा निवासी शिक्षक पंडित नवीन झा के अनुसार यह अंग्रेजी नव वर्ष है. लेकिन अब इसकी परंपरा चल चुकी है. सभी लोग इस दिन टूरिज्म स्थल के अलावे मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना करते हैं. नया साल नई उम्मीदों का साल माना जाता है. पुराने साल की विदाई और नव वर्ष के आगमन को हर कोई यादगार बनाने के लिए आतुर दिखते हैं. कोई दर्शनीय स्थल तो कोई पिकनिक स्पॉट पर वर्ष का प्रथम दिन मौज मस्ती में गुजारना चाहता है तो इससे अलग मिथिलांचल के प्रसिद्ध शिव नगरी बाबा हरिगिरिधाम गढ़पुरा में नव वर्ष के दिन भक्तों की भीड़ उमड़ती है. बेगूसराय,समस्तीपुर, दरभंगा,खगड़िया समेत कई जिले के लोग नववर्ष के दिन बाबा हरिगिरिधाम पहुंचकर भगवान शिव के ऊपर जलाभिषेक करते हैं. खासकर नई नवेली दूल्हा दुल्हन की जोड़ी नव वर्ष पर बाबा हरिगिरिधाम में काफी संख्या में पहुंचकर अपने सुखमय जीवन की मन्नतें मांगते हैं.कहीं जाने से पूर्व श्रद्धालु नए साल में घर परिवार में सुख समृद्धि मिले इसको लेकर बाबा हरिगिरिधाम पहुंचकर भगवान शिव से आशीष लेने पहुंचते हैं. पंडित नवीन झा ने बताया कि नव वर्ष पर भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से मानव जीवन के लिए काफी लाभदायक होगा. उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से इस दिन भगवान शिव के मंदिर में जाकर जलाभिषेक करें जिससे जीवन में सुख शांति एवं समृद्धि बनी रहेगी.उन्होंने कहा कि हरिगिरिधाम रिद्धि सिद्धि के लिए प्रसिद्ध माना जाता रहा है.

इन मंदिरों में भगवान की होती है पूजा

प्रसिद्ध शिवनगरी हरिगिरिधाम में भगवान भोलेनाथ के अलावे परिसर में बने पार्वती मंदिर, काली मंदिर, दुर्गा मंदिर, हनुमान मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर, सूर्य मंदिर, राम मंदिर, कृष्ण मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले भक्तों की भीड़ रहती है. नव वर्ष के अवसर पर हरिगिरिधाम आकर्षण का केंद्र बना रहता है.

ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह स्थल का दर्शन किये बिना बाबा हरिगिरिधाम का दर्शन अधूरा

गढ़पुरा प्रखंड मुख्यालय स्थित नमक सत्याग्रह स्थल पर घूमे बिना गढ़पुरा का दर्शन अधूरी मानी जाती है. बताते चलें कि वर्ष 1930 में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बिहार केशरी डा० श्रीकृष्ण सिंह अंग्रेजो के द्वारा बनाया गया नमक आंदोलन को भंग किया था. यह बिहार का प्रथम स्थान है जहां पहली बार नोनिया मिट्टी से नमक बनाकर अंग्रेजो का बिरोध किया गया था. इस क्रम में अंग्रेजों के सिपाहियों ने श्री बाबू को नमक बनाने के दौरान नमक से खौलती कराह में धकेल दिया गया था यह दिन आज भी इतिहास के पन्ने में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा हुआ है. इसी ऐतिहासिक स्थल को देखने के लिए नववर्ष के दिन सैकड़ों के संख्या में लोग नमक सत्याग्रह स्थल पर पहुंचते हैं. हालांकि सरकार के उदासीनता के कारण यह स्थल आज भी सौंदरीकरण के लिए मुंह चिढ़ा रहा है.

हरसाइन स्तूप से लेते हैं कांवर का नजारा

गढ़पुरा प्रखंड के रजौर पंचायत के सकरा स्थित हरसाइन स्तूप वैसे तो प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब मृत प्राय होने के कगार पर है लेकिन नववर्ष के दिन इस स्तूप पर सैकड़ों की संख्या में सैलानी पहुंचकर कावर प्रक्षेत्र का नजारा लेते हैं.

हसनपुर-मंझौल पथ पर रहती है बड़े वाहनों की नो इंट्री

नव वर्ष के अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने हसनपुर से मंझौल जाने वाली सड़कों पर प्रत्येक वर्ष बड़े वाहनों की नो एंट्री रहती है. लोगों की भीड़ को देखते हुए गढ़पुरा से लेकर हरसाइन तक जगह जगह पुलिस भी प्रतिनियुक्त किए गए हैं. इस दिन बड़े वाहन को सुंदरवन चौक से दौलतपुर होते हुए खोदाबन्दपुर, चेरिया बरियारपुर, मंझौल होकर बेगूसराय जाना होता है इसके लिए सुंदरबन चौक पर पुलिस बल की तैनाती रहती है. इसको लेकर बकायदा बखरी एसडीएम सन्नी कुमार सौरभ ने पत्र प्रेषित भी किया है.

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By MANISH KUMAR

MANISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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