कार्यशाला के समापन पर बाल रंगमंच के कलाकार देंगे नाट्य प्रस्तुति

इन दिनों मध्य विद्यालय बीहट का प्रांगण सिर्फ एक स्कूल नहीं,बल्कि सपनों का एक जीवंत मंच बन गया है.

बीहट. इन दिनों मध्य विद्यालय बीहट का प्रांगण सिर्फ एक स्कूल नहीं,बल्कि सपनों का एक जीवंत मंच बन गया है.पिछले दस दिनों में यहां बच्चों और युवाओं की आंखों में जो चमक दिखी,वह सिर्फ अभिनय सीखने की नहीं,बल्कि खुद को पहचानने की थी. रंगकर्मी स्वप्ना छेत्री के मार्गदर्शन में इन कलाकारों ने संवाद बोलना ही नहीं सीखा,बल्कि हर शब्द में भावनाओं का संप्रेषण डालना,हर किरदार को जीना और मंच पर अपने डर को हराना भी सीखा. संस्था निदेशक ऋषिकेश कुमार ने बताया कि बाल रंगमंच आर्ट एंड कल्चरल सोसाइटी द्वारा आयोजित 10 दिवसीय नाट्य कार्यशाला अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और आज इसका समापन एक भावुक और यादगार पल के रूप में सामने आएगा.कार्यशाला में प्रशिक्षित वही बच्चे और युवा अपने इस सफर को मंच पर उतारेंगे. “कोशिश” और “एक शाम मेरी कहानी” जैसे नाटकों के जरिए वे अपनी भावनाएं,अपने संघर्ष और अपने सपनों को दर्शकों के सामने रखेंगे.यह सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं होगी,बल्कि उन दस दिनों की मेहनत, लगन और हौसले की कहानी होगी. इस प्रस्तुति में राज लक्ष्मी, रिया, कंचन, सुहानी, मुस्कान, मौसम, आकाश कुमार, राजेश, ऋषि कुमार, विजेंद्र कुमार, सुमित कुमार, आयुष, प्रशांत और कई अन्य कलाकार मंच पर अपनी दुनिया रचेंगे. हर चेहरा एक कहानी कहेगा, हर संवाद दिल को छू जायेगा. उन्होंने कहा यह कार्यशाला सिर्फ अभिनय सिखाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने बच्चों को आत्मविश्वास दिया. उन्हें अपनी बात कहने का साहस दिया. उनके अनुसार,रंगमंच वह जगह है, जहां एक साधारण बच्चा भी अपने भीतर छिपे असाधारण इंसान को खोज लेता है.

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By Manish kumar

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