शहीदों के सम्मान में मोकामा के लिए रवाना हुआ जत्था

बिहार अभिभावक-शिक्षक संघ बेगूसराय के तत्वावधान में एक जत्था शहीदों के सम्मान में बेनर पोस्टर से सज्जी टैक्सी से प्रफुल्ल चाकी तीर्थ स्थल मोकामा के लिए प्रस्थान किया.

बेगूसराय. बिहार अभिभावक-शिक्षक संघ बेगूसराय के तत्वावधान में एक जत्था शहीदों के सम्मान में बेनर पोस्टर से सज्जी टैक्सी से प्रफुल्ल चाकी तीर्थ स्थल मोकामा के लिए प्रस्थान किया. ज्ञात हो कि 02-मई 1908 को मोकामा घाट रेलवे स्टेशन पर जहा शहीद प्रफुल्ल चाकी ने ब्रिटिश सेना से लड़ते हुए ख़ुद को अपने पिस्तौल की गोली से शहीद कर लिया था. वे अंग्रेजी हुकूमत के हाथों क़ैद होना नहीं चाहते थे. सादे वर्दी में पुलिस इंस्पेक्टर नंदलाल बनर्जी के गद्दारी से घिर गये थे. वे 30 अप्रैल 1908 को सेशन जज डगलस किंग्सफोर्ड के बग्गी पर बम फेंका था. जिसमें किंग्सफोर्ड बच गया जबकि बेरिस्टर की पत्नी और वेटी की जान धोखे से चली गई थी. वहां से भागते हुए खुदीराम बोस पूसा में गिरफ्तार और प्रफुल्ल चाकी मोकामा में जान की कुर्बानी दे दी. आज उनकी 119 वीं शहादत दिवस को समारोह पूर्वक जत्था एवं स्थानीय लोगों के सहयोग से उनके जीर्णशीर्ण स्मृति द्वार पर पुष्पांजलि अर्पित किया गया और उनके जज्बे और सपने को मोमबत्ती जलाकर प्रकाशित कर जागरूकता अभियान चलाया गया. समारोह की अध्यक्षता विजय शंकर सिंह, अवकाश प्राप्त पदाधिकारी मोकामा ने किया. संचालन आनन्द शंकर ने किया. समारोह में नगर परिषद सदस्य मोकामा,संजीव कुमार, नगर कांग्रेस अध्यक्ष, कॉ राज नारायण राय अधिवक्ता, राजीव कुमार अधिवक्ता, कॉ मनोज यादव किसान नेता उपस्थित थे. संतोष कुमार ईश्वर, प्राचार्य सह समाजसेवी ने कहा कि आज कुछ सत्ता धारी मुख्यमंत्रियों के द्वारा आजादी के संग्राम के इतिहास को ग़लत तरीके से परोसा जा रहा है. जबकि प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस के बम के धमाके से बिहार की धरती पर योगेन्द्र शुक्ला एवं बैकुंठ शुक्ला जैसे रणबांकुरे पैदा लिये थे.

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By MANISH KUMAR

MANISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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