आरा : लगभग चार वर्ष पहले नगर निगम को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रयास किया जा रहा था, ताकि लोगों को स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकें, पर निगम की लापरवाही के कारण नगर को स्मार्ट सिटी, तो नहीं बनाया जा सका, लेकिन कूड़े के ढेर में तब्दील जरूर किया जा रहा है. इससे नगरवासियों में निराशा का माहौल है. अन्य सुविधाएं तो नदारद ही हैं. सफाई जैसी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो रही हैं.
कचरे से पटा नगर, लोगों को परेशानी
आरा : लगभग चार वर्ष पहले नगर निगम को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रयास किया जा रहा था, ताकि लोगों को स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकें, पर निगम की लापरवाही के कारण नगर को स्मार्ट सिटी, तो नहीं बनाया जा सका, लेकिन कूड़े के ढेर में तब्दील जरूर किया जा रहा है. इससे नगरवासियों में […]

सफाई पर किये जाते हैं लाखों रुपये खर्च : नगर के विकास को लेकर निगम द्वारा प्रति वर्ष पौने चार अरब रुपये खर्च किये जाते हैं. इसमें लाखों रुपये प्रतिमाह सफाई के लिए खर्च किये जाते हैं, पर सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है. एक तरफ नालियों की सफाई नहीं की जाती है. वहीं, दूसरी तरफ कई जगह नालियों का निर्माण आधे अधूरे ही किया गया है. कई जगह मोहल्ले में तो नाली बनायी गयी है, पर मुख्य सड़क पर नाली का निकास नहीं है.
सड़क किनारे पसरे कचरे से हो रही है परेशानी : नगर की लगभग सभी सड़कों के किनारे कचरा पसरा हुआ है. इसकी नियमित सफाई नहीं की जाती है. वहीं, मुहल्लों में भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है. नियमानुसार मुख्य सड़क व मोहल्ले की सड़कों की प्रतिदिन सफाई करनी है, पर हालात ऐसे हैं कि कई सड़कों पर पानी नाली से निकलकर बह रहा है. सफाई के अभाव में नालियां जाम हो रही हैं, पर नगर निगम हाथ-पर-हाथ धरे बैठा है.
योजना के अनुरूप नहीं बने नाला : योजना के अनुसार सब्जी गोला से लेकर चंदवा पुल के पास छोटी नदी में नाले को गिराना था, पर विभाग की लापरवाही के कारण नाले को चंदवा मोड़ तक ही बनाया गया. पानी निकालने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सड़क की दूसरे तरफ बने नाले में मुख्य मुख्य सड़क के बीच से ले जाकर मिला दिया गया.
बोले उप नगर आयुक्त
इसकी जांच की जायेगी तथा नाली जाम करनेवालों पर कार्रवाई की जायेगी. कचरा की सफाई करायी जाती है. मोहल्लों में सफाई का जिम्मा वार्ड सदस्यों की है.
राजेश कुमार, उप नगर आयुक्त