Bihar news: अब इस बात पर लोग भी यकीन करने लगे हैं कि पटना में विकास की जो भी फाइल जाती है, उसके जल्द लौट पाने की उम्मीद नहीं होती. एक बार फिर दो ऐतिहासिक स्थलों के विकास योजनाओं से संबंधित फाइल पटना में अटक गयी है. पहली फाइल बटेश्वर स्थान की, तो दूसरी शाहजंगी पहाड़ी की है. बटेश्वर स्थान का तो सर्वे भी पूरा हो चुका है. शाहजंगी पहाड़ी के विकास को लेकर जो तामझाम किये गये, उतनी तेजी इसके काम को लेकर नहीं दिख रही है.
पर्यटन विकास निगम के पास पड़ी है फाइल
कहलगांव स्थित ऐतिहासिक बटेश्वर स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को लेकर इस परिसर का दो माह पहले ही सर्वे कर बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की टीम पटना लौट चुकी है. विभिन्न स्थलों की मापी करते हुए सर्वे का काम निगम के आर्किटेक्ट के नेतृत्व में किया गया था, लेकिन वर्तमान में पर्यटन विकास निगम के पास यह फाइल किस स्थिति में है और काम कब तक शुरू हो सकेगा, इसकी कोई जानकारी जिले के संबंधित पदाधिकारी नहीं दे पा रहे हैं. पर्यटन विभाग को जिला प्रशासन ने एक फॉर्मेट में प्रस्ताव जुलाई में ही भेज दिया था. पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने गत 13 जुलाई को भागलपुर आने के बाद कहा था कि बटेश्वर स्थान के काम को तेजी से आगे बढ़ायेंगे.
बटेश्वर के विकास कार्य में ये शामिल
बटेश्वर स्थान में एक किलोमीटर लंबी सड़क पर पेवर ब्लॉक बिछाये जायेंगे. टॉयलेट की बेहतर व्यवस्था होगी. पेयजल की सुविधा दी जायेगी. बटेश्वर बाबा का मंदिर पहाड़ पर स्थित है और समेकित रूप से यह आकर्षक स्थल है. लिहाजा एक व्यू प्वाइंट बनाया जायेगा, जहां से यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को लोग देख पायेंगे. गंगा मेें स्नान करनेवाले लोगों के लिए चेंजिंग रूम की सुविधा मिलेगी. वर्तमान में यहां चाय-नास्ते की छोटी-छोटी दुकानें हैं, जबकि पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए यहां कैफेटेरिया भी बनेगा.
शाहजंगी पहाड़ी : आमलोगों के बीच खींचा गया था विकास का खाका
शाहजंगी पहाड़ी व इसके सामने स्थित तालाब समेत पूरे परिसर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनी है. गत 13 जुलाई को शाहजंगी पहाड़ी परिसर में स्थानीय लोगों के बीच विकास का खाका खींचा गया था. लोगों में इस बात की उम्मीद जगी थी कि अब शाहजंगी पहाड़ी का काम शुरू कर दिया जायेगा. इस कार्यक्रम में बिहार सरकार के तत्कालीन उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन, पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन व पर्यटन विकास निगम के अभियंता स्थल निरीक्षण करने पहुंचे थे. तालाब, पहाड़ी पर स्थित मजार व परिसर के अन्य हिस्से का किया था मुआयना.
इन सबकी बनी थी योजना
प्रारंभिक रूप से तय किया गया था कि तालाब के बीच में फाउंटेन (फव्वारा) लगाया जायेगा. परिसर में पर्यटकों व श्रद्धालुओं के लिए कैफेटेरिया (अल्पाहार गृह) का निर्माण किया जायेगा. बच्चों के मनोरंजन की व्यवस्था की जायेगी. पौधरोपण किया जायेगा और परिसर में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी. यह वक्फ की जमीन है. इस कारण किसी प्रकार की समस्या नहीं है. परिसर की घेराबंदी की जायेगी. ईदगाह के पास भी एक गेट रहेगा.
इन योजनाओं को तो भूल ही गया भागलपुर
विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय : विश्वविद्यालय का निर्माण कहलगांव के परशुरामचक एकडारा में किया जाना सबसे अधिक उपयुक्त होगा. इस बात की रिपोर्ट केंद्रीय साइट सेलेक्शन कमेटी ने 02 जुलाई 2021 को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय को सौंप दी थी. रिपोर्ट सौंपने के बाद एक साल गुजर गया, लेकिन निर्माण की सुगबुगाहट भी शुरू नहीं हो सकी.
बस स्टैंड का निर्माण कार्य भी नहीं हो सका शुरू
बाइपास के किनारे रक्शाडीह में बस स्टैंड निर्माण करने का निर्णय सात फरवरी 2020 को तत्कालीन डीएम प्रणव कुमार ने लिया था. इसके बाद 26 दिसंबर 2020 को तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त ने आरटीए की बैठक में निर्माण के बाबत तमाम प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था, लेकिन बस स्टैंड का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका.
