अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम पर कार्यशाला आयोजित

अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ.

कटोरिया. आनंदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत कड़वामारण गांव स्थित ज्ञान भवन परिसर में शनिवार को बिहार लोकमंच व सामाजिक सुरक्षा मंच (सीसीएफएफ) के संयुक्त तत्वावधान में अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ. सामाजिक कार्यकर्ता रूबी कुमारी की अध्यक्षता में दलित मसीहा बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर के तैल चित्र पर माल्यार्पण के बाद दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत उदघाटन दलित मुक्ति मिशन के निदेशक महेंद्र कुमार रौशन ने किया. संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि यह अधिनियम अत्याचार निवारण के लिए बड़ा हथियार है. यह हमें सुरक्षा व न्याय दिलाने में सहायक है. हालांकि कभी-कभी इसका दुरुपयोग के भी प्रमाण मिल जाते हैं. अधिनियम में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समझकर, विभिन्न प्रकार के यातनाएं, प्रताड़ना, अपमानित करना, छेड़छाड़, मारपीट, गाली-गलौज, घर से बेघर, जमीन से बेदखल, रास्ता अवरुद्ध करना, राहजनी, आगजनी, गंदे काम करने पर मजबूर करने तथा जाति के आधार पर हर प्रकार भेदभाव एवं छुआछूत के विरुद्ध मुकदमा करने का प्रावधान है, जिसे सभी लोगों को जानने की जरूरत है. इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कुमार, सुनीता देवी, रंजन कुमार, सरोज कुमार, अनिल कुमार, रामजी ठाकुर, बालो पुझार, दीपक कुमार, कैलाश रजक आदि अन्य वक्ताओं ने बताया कि अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे की जांच डीएसपी या इस स्तर के पुलिस अधिकारी द्वारा किये जाने का प्रावधान है, किन्तु ऐसा होता नहीं है. इस अवसर पर झाझा व चांदन प्रखंड के विभिन्न गांवों से 65 सामुदायिक नेताओं ने भाग लिया.

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By SHUBHASH BAIDYA

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