बांका से नवनीत कुमार की रिपोर्ट :
जिले के नाबालिग व युवाओं के बीच ब्राउन शुगर व अफीम जैसे सूखे नशे की लत तेजी से फैल रही है. नशे की हालत में युवा चोरी, मारपीट और अन्य अपराधों को अंजाम दे रहे हैं. कई घरों में स्थिति इतनी बिगड़ गयी है कि बच्चे नशे के लिए माता-पिता से जबरन मारपीट कर पैसे मांग रहे हैं. पैसे न देने पर आत्महत्या तक करने की धमकी भी दे रहे हैं.स्कूल-कॉलेज के पास सक्रिय है यह तस्कर
स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे के सौदागर स्कूल, कोचिंग और बस स्टैंड के आसपास सक्रिय हैं. 14 से 18 साल के किशोर इनका आसान शिकार बन रहे हैं. पहले उसे मुफ्त में नशे की पुड़िया देकर लत लगाई जाती है, फिर पैसों के लिए मजबूर किया जाता है. एक पीड़ित पिता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मेरा 16 साल का बेटा पिछले 6 महीने से ब्राउन शुगर ले रहा है. रोज 500 से 1000 रुपये मांगता है. मना करने पर घर में तोड़फोड़ करता है और कहता है कि जान दे देंगे.
सूखा नशा से बढ़ रहा है अपराध
शहर में पिछले तीन महीनों में नशे की हालत में की गयी हर छोटी व बड़ी वारदातों के साथ-साथ चोरी और झगड़े के 20 से ज्यादा मामले सामने आये हैं, जिसका थाने में आवेदन दिया गया है. कुछ मामले में प्राथमिकी भी दर्ज हुई है. जिसमें पुलिस की कार्रवाई चल रही है. सूखा नशा का यह खेल पूरे जिला में चल रहा है. खासकर अमरपुर, बांका, बौंसी, कटोरिया और चांदन सहित अन्य प्रखंडों में यह समस्या ज्यादा गंभीर बनी हुई है.शहर की इन जगहों पर तस्करों व नशेड़ियों का लगता है जमावड़ा
शहर के विजयानगर पार्क के समीप, समहरणालय पार्क, ब्लॉक गेट के समीप स्थित नर्सरी, करहरिया, भयहरण स्थान स्थित दुर्गा मंदिर के पीछे, शास्त्री चौक, सुधा डेयरी के पीछे पशुपालन विभागीय के खंडहर में, अलीगंज स्थित नगर भवन के पीछे, एकसिंघा मोड़ स्थित चाय दुकान के पीछे, विजयनगर पासवान टोला स्थित पोखर के समीप, ब्लॉक परिसर स्थित एफसीआई गोदाम के समीप एवं रेलवे मैदान सहित अन्य जगहों पर नशेडियों व तस्करों का जमावड़ा लगा रहता है. हद तो यह भी है कि तस्कर का इतना बड़ा नेटवर्क फैला हुआ है कि पुलिस की हर गतिविधि पर उसकी नजर टिकी रहती है. पुलिस के सक्रियता के अनुसार तस्कर समय समय पर अपना जगह बदलते रहते है.
कहते हैं मनोचिकित्सक
सदर अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ एमयू फारुख माता-पिता को सलाह देते हुए कहते हैं कि वे अपने बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, पैसे की ज्यादा मांग, दोस्तों को बार बार बदलना और पढ़ाई से मन हटना आदि देख ले, तो समझ जाये कि यह सूखे नशा की लत का लक्षण हैं. ऐसी स्थिति में अभिभावक को बच्चों को डांटने के बजाय उन्हें प्यार से समझाएं. उसे अच्छे और बुरे कार्यों से अवगत कराने के साथ-साथ उनके गलत मित्रों से उन्हें अलग करने की जरूरत है. रचनात्मक कार्य, योग व खेलकूद में बच्चों की रुचि बढ़ाने से इस समस्या से निजात मिल सकता है. आगे चिकित्सक ने कहा है कि विशेष परिस्थिति में सदर अस्पताल में इसकी काउंसिलिंग की जाती है.कहते हैं एसपी
बांका के एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा कहते हैं कि इस मामले में पुलिस प्रशासन गंभीर है. कोटपा को सख्ती से लागू किया जा रहा है. नशे के सौदागरों की पहचान की जा रही है. जिले के विभिन्न स्कूलों, बस अड्डों आदि पर रोजाना छापेमारी करने का निर्देश सभी थानाध्यक्षों को दिया गया है. शिक्षा विभाग से इस मामले में जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया है.
