बांका,बौसी से संजीव पाठक की रिपोर्ट :
मंदार पर्वत स्थित रोपवे परिसर में आयोजित दो दिवसीय मॉक ड्रिल सह प्रशिक्षण शिविर का बुधवार को सफल समापन हो गया. दूसरे दिन एनडीआरएफ की टीम और रोपवे कर्मियों ने संयुक्त रूप से आपदा प्रबंधन का जीवंत अभ्यास कर अपनी तत्परता और समन्वय का शानदार प्रदर्शन किया.भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन (बिहटा) द्वारा मंगलवार से इस प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था. इसमें स्थानीय प्रशासन, रोपवे कर्मियों और अन्य विभागों के कर्मचारियों को शामिल कर संभावित आपदा से निपटने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.लाइव रेस्क्यू ऑपरेशन बना आकर्षण का केंद्र
मॉक ड्रिल के दौरान लोअर टर्मिनल के पास केबिन में यात्रियों के फंसे होने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई.एनडीआरएफ के विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए सफल रेस्क्यू ऑपरेशन का लाइव प्रदर्शन किया. इस दौरान अग्निशमन विभाग और स्थानीय पुलिस ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई.27 सदस्यीय टीम ने दिखाया समन्वय
इस संयुक्त अभ्यास में एनडीआरएफ के 27 सदस्यीय दल के साथ अग्निशमन विभाग और पुलिस की टीम ने मिलकर राहत-बचाव कार्यों को अंजाम दिया. पूरे ऑपरेशन का उद्देश्य आपातकालीन सुरक्षा तंत्र की परख और उसे और मजबूत बनाना था.पर्यटन सीजन को लेकर विशेष तैयारी
न्यू ईयर और पर्यटन सीजन को देखते हुए इस प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, ताकि बढ़ती भीड़ के बीच किसी भी दुर्घटना की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके.शिविर में यह भी बताया गया कि दुर्घटना के दौरान घायलों को सुरक्षित कैसे निकाला जाए, प्राथमिक उपचार कैसे दिया जाए और उन्हें शीघ्र अस्पताल तक कैसे पहुंचाया जाए. मेडिकल टीम ने भी इस दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं.सुरक्षा उपकरणों के उपयोग पर जोर
एनडीआरएफ टीम ने हेलमेट, दस्ताने सहित अन्य सुरक्षा उपकरणों के सही उपयोग की जानकारी दी, ताकि हादसे के समय कर्मचारियों और पर्यटकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.इस अवसर पर एनडीआरएफ कमांडेंट विवेक कुमार के नेतृत्व में इंस्पेक्टर आलोक कुमार, रोपवे प्रबंधक मुकेश कुमार, सीआई सत्यम सिंह सहित कई अधिकारी, मेडिकल टीम और स्थानीय प्रशासन के पदाधिकारी उपस्थित रहे. मालूम हो की इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित, सुरक्षित और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके.
