Shravani Mela 2026 : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम और बाबा बासुकीनाथ धाम जाने वाले शिवभक्तों की सेवा के लिए कटोरिया में रौनियार वैश्य संघ एक बार फिर नि:शुल्क कांवरिया सेवा शिविर लगाने जा रहा है. 29 जुलाई से शुरू होकर 27 अगस्त तक चलने वाले इस शिविर में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पेयजल, चिकित्सा, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगी.
दूसरे वर्ष भी कांवरियों की सेवा के लिए सजेगा शिविर
रौनियार वैश्य संघ कटोरिया की ओर से लगातार दूसरे वर्ष कांवरिया पथ स्थित किशनगंज सेवा सदन के समीप भव्य नि:शुल्क सेवा शिविर लगाया जा रहा है. शिविर का शुभारंभ 29 जुलाई 2026, बुधवार की शाम छह बजे होगा. इसके बाद यह शिविर पूरे श्रावण माह यानी 27 अगस्त 2026 तक लगातार संचालित रहेगा. संघ का उद्देश्य बाबा बैद्यनाथ धाम और बाबा बासुकीनाथ धाम जाने वाले लाखों शिवभक्तों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है.
भोजन, चिकित्सा और विश्राम की रहेगी नि:शुल्क व्यवस्था
सेवा शिविर में कांवरियों के लिए चौबीसों घंटे भंडारा, नींबू चाय, शरबत, फलाहार, शुद्ध पेयजल, मालिश, प्राथमिक चिकित्सा और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है. लंबी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को थकान और गर्मी से राहत देने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि उनकी यात्रा सुगम और सुरक्षित बन सके.
शिवभक्तों की सेवा में जुटे संघ के सदस्य
शिविर के सफल संचालन के लिए संघ के कई सदस्य सक्रिय रूप से तैयारियों में जुटे हैं. संतोष साह, रौशन कृष्ण, सूरज गुप्ता, संतोष सुमन, मनोज साह, महेश साह, मुन्ना भगत, रंजीत कुमार गुप्ता, रिंकू गुप्ता, गोपी गुप्ता और पंकज कुमार सहित अन्य सदस्य विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े.
उद्घाटन समारोह में शामिल होने की अपील
रौनियार वैश्य संघ के संस्थापक विजय आनंद ने कहा कि शिवभक्तों की सेवा सबसे बड़ा पुण्य कार्य है. इसी भावना के साथ संघ पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ सेवा शिविर का संचालन करेगा. उन्होंने क्षेत्र के सभी शिवभक्तों और समाज के लोगों से उद्घाटन समारोह में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने तथा सेवा कार्य में सहयोग देने की अपील की. उनका कहना है कि जनसहयोग से ही इस सेवा अभियान को और अधिक सफल बनाया जा सकता है.
