खजूरी डीह में महायज्ञ की तैयारी, नागा बाबा हठयोग साधना में लीन

शंभुगंज प्रखंड के खजूरी डीह गांव में चार मई से आयोजित होने वाले लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की छटा अभी से दिखायी देने लगी है

शंभुगंज. शंभुगंज प्रखंड के खजूरी डीह गांव में चार मई से आयोजित होने वाले लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की छटा अभी से दिखायी देने लगी है. यज्ञ परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है. महायज्ञ के कर्ताधर्ता याज्ञिक सम्राट क्रांतिकारी नागा बाबा शनिवार से तीन दिनों के लिए हठयोग साधना में लीन हो गए हैं. तेज धूप और भीषण गर्मी के बावजूद वे खुले मैदान में अग्नि के बीच एक ही मुद्रा में साधना कर रहे हैं. इस दौरान वे तीन दिनों तक निर्जल और निराहार रहकर तपस्या करेंगे. बाबा ने बताया कि हठयोग शरीर और मन के संतुलन की साधना है, जिसमें आसन, प्राणायाम, मुद्रा और षटकर्म का विशेष महत्व होता है. इसके साथ ही उन्होंने पंचध्वनि साधना, अग्नि तपस्या, मौन साधना, विश्व शांति साधना, पर्यावरण शुद्धिकरण, रोग निवारण और सकारात्मक ऊर्जा जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने रामानंदी धूनी के महत्व को बताते हुए कहा कि यह रामानंदी संप्रदाय के साधुओं द्वारा जलाई जाने वाली पवित्र अग्नि है, जो तपस्या, त्याग और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है. धूनी के पास बैठकर साधु भगवान राम के प्रति समर्पण भाव से साधना करते हैं और इसे गुरु तथा ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं. रामानंदी संप्रदाय, जिसकी स्थापना स्वामी रामानंद ने की थी, समानता और रामभक्ति पर आधारित है. इस परंपरा में साधु शरीर पर भस्म लगाते हैं, जो जीवन की नश्वरता का संदेश देती है. बाबा के हठयोग साधना शुरू करते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. पुरुष और महिलाएं योग स्थल की परिक्रमा करने लगे. “हर-हर महादेव ” और “जय श्रीराम ” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा. बाबा ने बताया कि यह महायज्ञ जनकल्याण, मानव धर्म की स्थापना और विश्व शांति के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है.

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By SHUBHASH BAIDYA

SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

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