क्या बच्चों को राष्ट्रप्रेम और अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षा के मंदिर में ही राष्ट्रीय ध्वज के साथ इतनी बड़ी लापरवाही हो सकती है? बांका जिले के पंजवारा से स्वतंत्रता दिवस के पावन मौके पर एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्कूल प्रशासन की तैयारियों की कलई खोलकर रख दी है. यहाँ आजादी के जश्न के दौरान राजकीय कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को उल्टा बांधकर फहरा दिया गया. हद तो तब हो गई जब उल्टा तिरंगा फहराए जाने के बाद पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान भी गा लिया गया, लेकिन वहां मौजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या शिक्षक की नजर इस ऐतिहासिक भूल पर नहीं पड़ी.
हवा रुकी तो छिपी रही भूल, अतिथि की तीखी फटकार के बाद जागा प्रशासन
यह पूरी सनसनीखेज घटना पंजवारा स्थित +2 राज्य संपोषित उच्च विद्यालय की है. शनिवार 15 अगस्त 2026 को स्कूल परिसर में स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन बड़े ही उत्साह के साथ किया जा रहा था. समारोह के दौरान विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका पिंकू कुमारी ने मुख्य ध्वजारोहण किया. झंडा फहराने के तुरंत बाद वहां मौजूद सभी लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान भी गाया. चूंकि उस समय हवा बिल्कुल नहीं चल रही थी, इसलिए तिरंगा पूरी तरह खुला नहीं और उसकी स्थिति स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही थी. लेकिन जैसे ही हवा चली और झंडा लहराया, तो वहां मौजूद अतिथियों, शिक्षकों और छात्रों के होश उड़ गए—तिरंगे का हरा रंग ऊपर था और केसरिया पट्टी नीचे लटक रही थी. इस घोर अपमान को देख समारोह में मौजूद एक मुख्य अतिथि का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने जिम्मेदार शिक्षक को सरेआम तीखी फटकार लगाई.
सालों से झंडा बांध रहे शिक्षक से हो गई इतनी बड़ी चूक!
विवाद और जांच का विषय यह है कि झंडा बांधने की जिम्मेदारी विद्यालय के शिक्षक सुरेन्द्र कुमार संभाल रहे थे. बताया जा रहा है कि वे कोई नए शिक्षक नहीं हैं, बल्कि पिछले कई सालों से लगातार इस विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय ध्वज बांधने का महत्वपूर्ण कार्य करते आ रहे हैं. इतनी लंबी अवधि का अनुभव होने के बावजूद उनके द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा बांध दिया जाना लोगों के गले नहीं उतर रहा है. अतिथि की फटकार के बाद आनन-फानन में शिक्षक सुरेन्द्र कुमार ने राष्ट्रीय ध्वज को नीचे उतारा और उसे सही तरीके से, यानी केसरिया रंग को सबसे ऊपर रखते हुए दोबारा बांधा और फिर से सम्मानपूर्वक फहराया गया.
'देशभक्ति की पाठशाला में ऐसी घोर लापरवाही क्यों?' भड़के अभिभावक
इस घोर लापरवाही की खबर जैसे ही स्कूल परिसर से बाहर निकली, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश फैल गया. अभिभावकों का कड़े लहजे में कहना है कि स्कूल ही वह मुख्य केंद्र होता है जहाँ बच्चे अपने देश के प्रतीकों का सम्मान करना, राष्ट्रप्रेम और अनुशासन का ककहरा सीखते हैं. यदि शिक्षा के मंदिर में ही शिक्षक और प्रधानाध्यापिका इतने गैर-जिम्मेदार होंगे, तो बच्चों पर इसका क्या असर पड़ेगा? स्थानीय लोगों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस मामले की जांच करने और राष्ट्रीय गौरव का अपमान करने वाले दोषियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी गलती की पुनरावृत्ति कभी न हो सके.
