लाखों की लागत से बना Open Gym बना शोपीस, प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय लखपुरा में जंग खा रहे उपकरण

Banka News : ग्रामीण युवाओं और छात्रों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित ओपन जिम आज बदहाली का शिकार बन चुका है. कभी फिटनेस और स्वास्थ्य जागरूकता का केंद्र रहा यह जिम अब टूटे उपकरणों, जंग लगी मशीनों और प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयां कर रहा है.

पंजवारा बांका से गौरव कश्यप की रिपोर्ट

Banka News : पंजवारा थाना क्षेत्र की लौढ़िया खुर्द पंचायत के लखपुरा गांव स्थित प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय परिसर में स्थापित ओपन जिम की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. युवाओं, छात्रों और ग्रामीणों के उपयोग के लिए लगाए गए कई उपकरण क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. कुछ मशीनों के महत्वपूर्ण हिस्से गायब हैं, जबकि कई उपकरण टूट-फूट के कारण उपयोग योग्य नहीं रह गये हैं. परिसर में फैली अव्यवस्था यह संकेत दे रही है कि लंबे समय से इसकी देखरेख नहीं की गयी है.

स्थापना के समय दिखा था उत्साह, अब छाया सन्नाटा

ग्रामीणों के अनुसार, जब ओपन जिम की स्थापना हुई थी, तब लोगों में इसे लेकर काफी उत्साह था. सुबह और शाम बड़ी संख्या में युवा तथा अन्य लोग यहां व्यायाम करने पहुंचते थे. लेकिन समय के साथ रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में जिम की स्थिति बिगड़ती चली गयी. असामाजिक तत्वों द्वारा उपकरणों को नुकसान पहुंचाने और कुछ हिस्सों को गायब कर देने की घटनाओं ने समस्या को और गंभीर बना दिया. नतीजतन आज यह सुविधा अपने मूल उद्देश्य से दूर होती नजर आ रही है.

सरकारी धन से बनी संपत्ति हो रही बर्बाद

स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर तैयार किये गये इस ओपन जिम का लाभ अब ग्रामीणों और विद्यालय के छात्रों को नहीं मिल पा रहा है. कई उपकरणों पर जंग लग चुकी है, जबकि कुछ मशीनें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी हैं. लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग और पंचायत प्रशासन की ओर से नियमित निगरानी नहीं होने के कारण सार्वजनिक संपत्ति बर्बाद हो रही है. इससे सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था की उठी मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से ओपन जिम की तत्काल मरम्मत कराने, क्षतिग्रस्त उपकरणों को बदलने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो यह जिम पूरी तरह अनुपयोगी हो जायेगा. ग्रामीणों का मानना है कि नियमित देखभाल और निगरानी से इस सुविधा को फिर से उपयोगी बनाया जा सकता है, जिससे युवाओं और छात्रों को इसका लाभ मिल सके.

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By Amit kumar sinh

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