कटोरिया (बांका). आर्थिक तंगी की वजह से जिन बच्चों के लिए पढ़ाई का सपना मुश्किल हो सकता है, उनके लिए कटोरिया का मदरसा तनवीरूल इस्लाम उम्मीद की किरण बना हुआ है. मदरसा पिछले करीब 30 वर्षों से सुदूर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराकर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहा है. मदरसे में बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है. वर्तमान में यहां 32 गरीब और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ भोजन और आवास की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है.
दीनी शिक्षा के साथ हिंदी, अंग्रेजी और गणित की पढ़ाई
मदरसा तनवीरूल इस्लाम में दीनी और धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों पर भी जोर दिया जाता है. बच्चों को उर्दू के अलावा हिंदी और अंग्रेजी भाषा की शिक्षा दी जाती है. इसके साथ गणित की पढ़ाई भी करायी जाती है. मदरसा प्रबंधन के अनुसार, बच्चों को समय के साथ आगे बढ़ाने के लिए कंप्यूटर शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी तैयारी की जा रही है. इसके लिए स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनायी गयी है. इससे ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले बच्चों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल शिक्षा से जोड़ने का अवसर मिलेगा.
32 बच्चों के रहने और खाने की भी व्यवस्था
वर्तमान में मदरसे में 32 बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है. इन बच्चों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था भी मदरसा प्रबंधन की ओर से की जा रही है. बांका और देवघर जिले के अलग-अलग प्रखंडों से आने वाले बच्चे यहां रहकर पढ़ाई करते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके रहने और भोजन का खर्च भी परिवार पर नहीं पड़ता.
नूरानी कायदा से कुरान-ए-मुकम्मल तक की शिक्षा
मदरसे में धार्मिक शिक्षा के तहत बच्चों को नूरानी कायदा से लेकर कुरान-ए-मुकम्मल तक की शिक्षा दी जाती है. इसके साथ कुरान शरीफ को याद कराने की भी व्यवस्था है.
मदरसा प्रबंधन का कहना है कि इस व्यवस्था के माध्यम से बच्चे धार्मिक शिक्षा हासिल करने के साथ हाफिज-ए-कुरान बनने की दिशा में भी आगे बढ़ते हैं. धार्मिक शिक्षा और सामान्य विषयों की पढ़ाई को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है.
स्थानीय लोगों के सहयोग से चल रही व्यवस्था
मदरसे की नि:शुल्क शिक्षण और आवासीय व्यवस्था क्षेत्र के सक्षम लोगों के सहयोग से संचालित हो रही है. स्थानीय लोग अपनी क्षमता के अनुसार तन, मन और धन से सहयोग करते हैं. मदरसा प्रबंधन के अनुसार, स्थानीय स्तर से मिलने वाला सहयोग बच्चों के भोजन, रहने और शिक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसी सहयोग के कारण लंबे समय से जरूरतमंद बच्चों के लिए यह व्यवस्था जारी है.
शिक्षकों की टीम संभाल रही पढ़ाई की जिम्मेदारी
मदरसे में शिक्षण कार्य की जिम्मेदारी मौलाना खुर्शीद अनवर, हाफिज अलाउद्दीन, यासीन खान, हाफिज कमरूद्दीन और कारी दिलजान रजा समेत अन्य शिक्षक संभाल रहे हैं. शिक्षकों की ओर से नियमित रूप से बच्चों को पढ़ाया जाता है. शिक्षण कार्य के संचालन की मॉनिटरिंग सनाबुल अंसारी करते हैं. वहीं बच्चों के भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी रसोइया तमन्ना शाह संभालते हैं. इस तरह शिक्षण के साथ बच्चों के आवास और भोजन की व्यवस्था भी नियमित रूप से संचालित की जा रही है.
अजमत रजा भागलपुरी ने किया निरीक्षण
बुधवार को अजमत रजा भागलपुरी ने मदरसा तनवीरूल इस्लाम पहुंचकर यहां संचालित नि:शुल्क शिक्षण कार्य और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. उन्होंने बच्चों को दी जा रही शिक्षा के बारे में जानकारी ली. उन्होंने बच्चों के भोजन और आवासीय व्यवस्था की भी जानकारी ली तथा मदरसे में संचालित व्यवस्था की सराहना की. निरीक्षण के दौरान मदरसा प्रबंधन ने उन्हें संस्थान के शैक्षणिक कार्य और जरूरतमंद बच्चों के लिए उपलब्ध करायी जा रही सुविधाओं से अवगत कराया.
शिक्षा के साथ भविष्य के लिए तैयार करने का लक्ष्य
मदरसा प्रबंधन का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार और आधुनिक ज्ञान उपलब्ध कराना है. करीब तीन दशक से चल रही यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे परिवारों के बच्चों को पढ़ाई का अवसर दे रही है, जिनके लिए नियमित शिक्षा हासिल करना आर्थिक कारणों से चुनौतीपूर्ण हो सकता है. अब स्मार्ट क्लास की योजना के साथ मदरसे में आधुनिक शिक्षा का दायरा बढ़ाने की तैयारी है. इससे यहां पढ़ने वाले बच्चों को पारंपरिक शिक्षा के साथ कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक से जुड़ने का अवसर मिलने की उम्मीद है.