टीकाकरण से मौत होने का लगाया आरोप
बांका/रजौन. रजौन थाना क्षेत्र के बखड्डा गांव निवासी पवन कुमार दास के पांच माह के पुत्र की शनिवार को संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गयी. इस घटना के बाद मासूम के परिजन शव को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रजौन पहुंचकर हंगामा किया. इस दौरान परिजनों के द्वारा टीकाकरण से मासूम की मौत होने का आरोप लगा रहे थे. इसी बीच मामले की जानकारी होने पर स्वास्थ्य महकमा ने पूरे मामले की अस्पताल पहुंंचकर जांच की. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि मृतक सहित अन्य चार बच्चों को गत 11 फरवरी को ही मिर्जापुर आंगनबाड़ी केंद्र पर टीकाकरण किया गया था. अगर किसी भी तरह की कोई परेशानी होती तो सभी बच्चों के साथ होती. क्योंकि सभी बच्चे को एक ही वाइल से टीका लगाया गया था, लेकिन टीकाकरण के चार दिन बाद बच्चे की मौत होने का टीकाकरण से कोई ताल्लुक नहीं है. प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने आगे बताया कि उक्त तिथि को आंगनबाड़ी केंद्र पर गांव के ही मारिया को प्रथम डोज, कार्तिक, अविनाश व राकेश पंझा को दूसरा डोज दिया गया था, सभी बच्चे स्वस्थ हैं. वहीं उक्त मासूम की मौत की कई संभावनाएं हैं, जिनमें सोने के दौरान कंबल या चादर से मुंह ढक जाने आदि से दम घुटने से भी हो सकती है, या फिर मां का दूध पिलाने के दौरान श्वांस नली में दूध जाने से भी हो सकती है. हालांकि बाद में अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ब्रजेश कुमार ने परिजनों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया.अफवाहों से बचने व टीकाकरण में सहयोग की अपील
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि भारत का राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है, जो हर साल लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं को 12 से अधिक घातक बीमारियों से बचाता है. यह कार्यक्रम बच्चों के लिए टीकों का मुफ्त टीकाकरण करता है, जिसमें बीसीजी (टीबी), डीपीटी, पोलियो, खसरा, हेपेटाइटिस-बी, रोटावायरस और न्यूमोकोकल वैक्सीन शामिल हैं, जिसका उद्देश्य मृत्यु दर और दिव्यांगता को कम करता है. टीकाकरण विभिन्न मानकों पर खरा उतरने के बाद ही सार्वजनिक तौर पर दिया जाता है. आमजनों को अफवाह से बचने एवं अनिवार्य रूप से टीकाकरण में सहयोग करने की अपील की है.
