मामा के साथ बीए का एक्जाम देने जा रही थी अमरपुर की खुशी, मुंगेर पुल पर ट्रक की चपेट में आने से मौत

Banka Road Accident News : हाथों में सुनहरे भविष्य के सपने थे, मन में परीक्षा को लेकर उत्साह था और मंजिल की ओर कदम बढ़ चुके थे. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. परीक्षा केंद्र पहुंचने से पहले ही एक दर्दनाक सड़क हादसे ने 21 वर्षीय छात्रा की जिंदगी छीन ली और पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया.

अमरपुर बांका से प्रीतम कुमार की रिपोर्ट

Banka News : अमरपुर थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव की रहने वाली 21 वर्षीय छात्रा खुशी कुमारी की शुक्रवार सुबह मुंगेर पुल के समीप हुए भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई. वह अपने मामा के साथ बाइक से बेगूसराय स्थित जीडी कॉलेज बीए की परीक्षा देने जा रही थी. इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी, जिससे छात्रा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई.

परीक्षा देने जा रही थी होनहार छात्रा

मृतका खुशी कुमारी, गोपालपुर गांव निवासी संजय ईश्वर की पुत्री थी. ग्रामीणों के अनुसार वह पढ़ाई में काफी अच्छी थी और परीक्षा को लेकर बेहद उत्साहित थी. शुक्रवार की सुबह वह अपने मामा मनीष कुमार उर्फ चिंटू के साथ बाइक पर सवार होकर बेगूसराय परीक्षा देने के लिए निकली थी.

मुंगेर पुल के समीप हुआ दर्दनाक हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार] मुंगेर पुल के समीप पीछे से आ रहे एक ट्रक ने अनियंत्रित होकर बाइक में जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही बाइक चालक दूर जा गिरा, जबकि खुशी कुमारी सड़क पर गिरकर ट्रक के पहिए के नीचे आ गई. हादसा इतना भयावह था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई.

बचपन से ननिहाल में रहकर कर रही थी पढ़ाई

ग्रामीणों ने बताया कि खुशी कुमारी बचपन से ही मुंगेर जिले के चरौन गांव स्थित अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही थी. परिवार और रिश्तेदारों को उससे काफी उम्मीदें थीं. उसकी मेहनत और लगन को देखकर सभी उसके उज्ज्वल भविष्य की कल्पना करते थे.

घर पहुंची मौत की खबर, मच गया कोहराम

घटना की सूचना जैसे ही गोपालपुर गांव स्थित पैतृक घर पहुंची, पूरे परिवार में कोहराम मच गया. मां रूपम देवी, बहनें निक्की कुमारी और मुन्नी कुमारी सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. परिजनों की चीख-पुकार सुनकर गांव का माहौल भी गमगीन हो गया.

मजदूरी कर बेटियों का भविष्य संवार रहे थे पिता

ग्रामीणों ने बताया कि खुशी तीन बहनों में सबसे बड़ी थी. उसके पिता संजय ईश्वर मुंबई में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं और अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा देकर उनका भविष्य संवारने का सपना देख रहे थे. बेटी की असमय मौत ने परिवार की खुशियां छीन ली हैं.

गांव में पसरा मातम, हर आंख हुई नम

मृतका के पड़ोसियों और ग्रामीणों ने बताया कि खुशी बेहद मृदुल स्वभाव की और प्रतिभाशाली छात्रा थी. उसकी व्यवहार कुशलता के कारण गांव में सभी लोग उसे पसंद करते थे. हादसे की खबर के बाद पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध है.

अधूरे रह गये सपने

जिस परीक्षा को लेकर खुशी कुमारी ने तैयारी की थी, उसी परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले उसकी जिंदगी की राह थम गई. परिवार की उम्मीदें, उसके सपने और भविष्य की तमाम योजनाएं एक सड़क हादसे की भेंट चढ़ गईं. यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे इलाके के लिए गहरा दुख छोड़ गई है.

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लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

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