परेशानी. इंटरस्तरीय प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय कटोरिया का भवन कमजोर
सरकार ‘बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ’ के नारे को बुलंद कर बालिका शिक्षा के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही हैं. वहीं दूसरी ओर कितने स्कूलों में ना छत है ना बैठने के लिए िलए कोई व्यवस्था है.
कटोरिया : कटोरिया स्थित इंटरस्तरीय प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल में नवम, दशम व इंटर में अध्ययनरत एक हजार से भी अधिक छात्राएं जमीन पर बैठ कर पढ़ाई करने को विवश हैं. बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कटोरिया में बालिकाओं के लिए माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था की हालत बद से बदतर स्थिति में है.
लौट गयी भवन निर्माण की राशि : इंटरस्तरीय प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय कटोरिया के भवन की हालत काफी जर्जर हालत में है. नये भवन निर्माण के लिए सरकार की ओर से करीब एक करोड़ की राशि आवंटित भी हुई थी. लेकिन पहले जमीन की कमी, फिर संवेदक द्वारा इनकार करने के कारण स्वीकृत राशि भी लौट चुकी है. नतीजतन विद्यालय की छात्राएं जर्जर भवन में ही पढ़ाई को मजबूर हैं. विद्यालय की छत व दिवार में दरार आ गयी है, चहारदीवारी भी टूट चुकी है.
पानी के लिए तरसती हैं छात्राएं : गर्ल्स हाई स्कूल में पेयजल संकट की भी स्थिति काफी गंभीर है. प्यास लगने पर छात्राएं प्रखंड मुख्यालय परिसर स्थित चापाकल पर पानी पीने जाने को विवश हैं. चूंकि एक चापाकल की खराबी के बाद लगा दूसरा नया चापाकल भी फेल हो चुका है. पानी के अभाव में शौचालय भी बेकार पड़ा है.
शिक्षकों का भी है अभाव : गर्ल्स हाई स्कूल को भले ही इंटर का भी दर्जा मिल गया हो, लेकिन इसमें शिक्षक मवि इतना भी नहीं हैं. जबकि कुल नामांकित छात्राओं की संख्या 1177 है. यहां नवम में 515, दशम 442, ग्यारहवीं 70 व बारहवीं कक्षा में 150 छात्राएं नामांकित हैं. प्रभारी प्रधानाध्यापक हिमांशु कुमार झा के अलावा प्लस-टू की दो शिक्षिका निशा सिंह व राखी कुमारी पदस्थापित हैं. एक अन्य शिक्षिका रेणु सिंह प्रतिनियुक्ति पर हैं. शिक्षकों की कमी के कारण छात्राओं का पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हो पाता है.
