कब बनेगा स्टेडियम
बांका शहर में एक भी सुव्यवस्थित खेल मैदान नहीं है. शहर में जरूरत पड़ने पर आरएमके स्कूल या पीबीएस कॉलेज के मैदान में खेल या टूर्नामेंट आयोजित होते हैं, पर इन दोनों मैदान की भौगोलिक बनावट भी बेतरतीब है. इनका इस्तेमाल अन्य आयोजनों के लिए भी होता रहता है. बच्चे व युवा खेत-खलिहान में खेलने को विवश रहते हैं.
बांका : बांका शहर के युवा एवं बच्चे एक अदद सुविधा संपन्न खेल मैदान के लिए मोहताज हैं. शहर में कोई खेल मैदान नहीं है. ले देकर शहर के बीच आरएमके स्कूल का मैदान और तीन किलोमीटर दूर पीबीएस कॉलेज का मैदान है. ये दोनों ही मैदान संबंधित शिक्षण संस्थानों के हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर कोई खेल आयोजन या टूर्नामेंट इन्हीं मैदानों पर आयोजित होते हैं. खास बात यह भी है कि ये दोनों ही मैदान सुव्यवस्थित नहीं है. इनकी भौगोलिक बनावट भी बेतरतीब है. काम चलाने भर के लिए इन मैदानों का इस्तेमाल खेल या टूर्नामेंट के आयोजनों के लिए होता हैं.
इन दोनों मैदानों के अलावा शहर के विभिन्न हिस्सों में कहीं इतनी जगह भी नहीं, जहां बच्चे और युवा सुबह-शाम स्वांत: सुखाय के लिए भी खेल सकें. नतीजतन वे जहां-तहां उबड़-खाबड़ खेत खलियानों में खेल कर संतोष कर लेते हैं. कभी शहर के पूर्वी हिस्से में चांदन नदी तट पर एमआरडी का भी मैदान हुआ करता था, लेकिन 1995 में चांदन नदी में आयी विनाशकारी बाढ़ ने यह मैदान लील लिया.
अब यह मैदान नदी का हिस्सा बन चुका है. बढ़ते शहरीकरण के बीच बांका में खेल का एक अदद मैदान यहां के बच्चों और युवाओं की जरूरत है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है. न ही प्रशासन का और न ही जनप्रतिनिधियों का.
