बांका : देश के मसजिदों, दरगाहों, मदरसों एवं कब्रिस्तानों पर तालीबानी विचारधारा के वहाबी अपना कब्जा एवं तालिबानीकरण कर रहे हैं. जबकि ये इमारतें सूफी और वलियों की है. इसे वहाबियों से मुक्त कराना है.
उक्त बातें अहले सुन्नत वक्फ प्रोटेक्शन काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह अजमेर शरीफ ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह के गद्दीनशीं सैयद सुल्तानुल हसन चिस्ती मिस्बाही ने रविवार को शहर के मल्लिकटोला स्थित तनजीम-ए-अल्लमाए अहलेसुन्नत व अल्लमाए काउंसिल सदस्य के आवास पर प्रेस वार्ता के दौरान कही. उन्होंने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड में दो अलग-अलग विचारधाराओं के लोग शामिल हो गये हैं जिससे देश पर खतरा उत्पन्न हो गया है.
देश का अहित सोचने वाले वहाबियों को अलग करने के लिए 6 अप्रैल 2015 को सुन्नी वक्फ बोर्ड की स्थापना की गयी थी. इन वहाबियों के द्वारा देश भर में करीब 20 से 25 इमारतों पर कब्जा कर लिया गया है. जहां पर तालिबानी, आईएसआईएस, इंडियन मोजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठन का पाठ पढ़ाया जा रहा है, जिसे सुन्नी विचारधारा के लोग मानने को तैयार नहीं हैं. हमारा संगठन रणनीति तैयार कर रहा है कि कैसे इन वहाबियों के संगठन को सुन्नी वक्फ से अलग किया जा सके. ये हिन्दू मुसलिम एकता के विरोधी हैं. मौके पर अहले सुन्नत वक्फ प्रोटेक्शन काउंसिल के राष्ट्रीय महासचिव मो हामिद, मौलाना मो इलियास फैजी, मौलाना अबूबकर वासनी नागौर शरीफ, सैयद सिकली मिया, सैयद मो युसूफ, मो अब्बास, मो. जमीरूद्दीन, हजरत मौलाना गुलाम सरबर, मो गुलाम अमहद रजा, मौलाना मो. मुनीर, मो. खुर्शीद, मो शमसीर आदि उपस्थित थे.
