जिला स्थापना की 25वीं वर्षगांठ आज

आयोजन. दुल्हन की तरह सजा है समाहरणालय, होंगे विविध कार्यक्रम मनोज उपाध्याय बांका : बांका जिला रविवार को अपनी स्थापना की 25 वीं वर्षगांठ मना रहा है. लिहाजा यह जिले की रजत जयंती वर्षगांठ है. 21 फरवरी 1991 को बांका पृथक जिला के रूप में अस्तित्व में आया था. इससे पहले यह भागलपुर जिले के […]

आयोजन. दुल्हन की तरह सजा है समाहरणालय, होंगे विविध कार्यक्रम
मनोज उपाध्याय
बांका : बांका जिला रविवार को अपनी स्थापना की 25 वीं वर्षगांठ मना रहा है. लिहाजा यह जिले की रजत जयंती वर्षगांठ है. 21 फरवरी 1991 को बांका पृथक जिला के रूप में अस्तित्व में आया था. इससे पहले यह भागलपुर जिले के अंतर्गत एक अनुमंडलीय प्रशासनिक इकाई थी. तत्कालीन बांका अनुमंडल के मौजूदा स्वरूप को अलग कर हीं इसे जिले का दर्जा दिया गया.
सरकार के इस निर्णय के पीछे इस क्षेत्र में प्रशासनिक क्षमता व कुशलता के साथ ही बुनियादी ढांचागत विकास को गति देने का लक्ष्य सन्निहित था, लेकिन स्थापना के 25 वर्षों में जिले का अपेक्षित सपना पूरा हो सका है क्या? विभिन्न वर्गों से इस सवाल का जवाब अलग-अलग मिलता हैं. प्रशासन का दावा है-बहुत कुछ हुआ है. जनप्रतिनिधि कहते हैं- सब कुछ हो जायेगा. आमलोग कहते हैं- कुछ हुआ है लेकिन बहुत कुछ बांकी हैं. सच पूछा जाय तो बांका में अभी बहुत कुछ होना बांकी है. जिला बनने के ढ़ाई दशक बाद भी यहां समस्याओं की एक लंबी फेहरिश्त है. बुनियादी ढांचागत विकास के क्षेत्र में भी यह जिला अत्यंत पिछड़ा है.
जनप्रतिनिधियों में इच्छाशक्ति की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण विकास की पटरी पर यह जिला अब भी रेंग कर ही चल रहा है. केंद्रीय व राज्य सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन को प्रशासनिक तौर पर इस जिले की उपलब्धि के तौर पर गिना दी जाती है, लेकिन संस्थागत ढांचा विकास इस जिले में अब तक नहीं के बराबर हुआ है.
संस्थागत ढांचा विकास के मामले में अब भी पिछड़ा है जिला: जिले में उच्चतर शिक्षा का संस्थागत ढांचा बेहाल है. एक मात्र अंगीभूत इकाई के अलावा दूसरा कोई कॉलेज इस जिले में अंगीभूत नहीं हुआ. उच्च विद्यालयों की संख्या भी नगण्य बढ़ी. 68 हाई स्कूलों में लड़कियों के लिए सिर्फ चार विद्यालय हैं.
इनमें से भी एक में आधे नामांकित लड़के ही हैं. लड़कियों के लिए जिले में कोई पृथक सरकारी कॉलेज नहीं है. विकास का लब्बोलुआब यह है कि डीएम व एसपी आज भी क्रमश: पीडब्लूडी व जिला परिषद के निरीक्षण भवनों में रह रहे हैं. जिला बनने के 25 वर्ष बाद भी उनके लिए आवास नहीं बन पाया. जिला व सत्र न्यायालय भी सिर्फ एक वर्ष पूर्व बना है. अनेक सरकारी विभागों के दफ्तर के लिए यहां सरकारी भवन नहीं हैं और जो भवन बने है वे उपयोग के अभाव में खाली पड़े हैं. जिले में सिंचाई, पेयजल आदि की भी स्थिति आज 25 साल पूर्व की ही है. न कोई बड़ी योजना और न ही भविष्य में उनकी संभावना. सड़कों की हालत खराब है. जिले में तकनीकी शिक्षा के लिए आइटीआइटी को छोड़ और कोई संस्थान नहीं.
बहुत कुछ बदला भी है जिला बनने के बाद
ऐसा भी नहीं कि जिला बनने के बाद यहां कुछ नहीं हुआ. डीएम, एसपी व जिला व सत्र न्यायालय के यहां हो जाने से लोगों की परेशानी कम हुई है. विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ा है.
शहरीकरण का विस्तार तेजी से हुआ है. जमीन के दाम बढ़े हैं. बांका में आज रेलवे स्टेशन है जहां ट्रेन पर सवार होकर लोग राज्य की राजधानी तक का बेखटके सफर कर सकते है. बांका में सदर अस्पताल, पावर ग्रीड स्टेशन, ग्रीड सबस्टेशन, अनेक पब्लिक स्कूल, सरकारी क्षेत्र के सेंट्रल स्कूल आदि भी अब बांका में हैं. अनेक पुल-पुलियों का निर्माण भी दौर में जिले में हुआ. इससे लोगों को फायदा पहुंचा है. यह बात दीगर है कि जिन नदियों पर पुल बने उनके बालू के बेहिसाब उत्खनन ने नदियों का ही स्वरूप यहां बिगाड़ कर रख दिया हैं.
आज होगा विविध कार्यक्रमों का आयोजन
इन सब के बीच जिला रविवार को अपनी स्थापना के 25 वीं वर्षगांठ धूमधाम से मना रहा है. समाहरणालय को दुल्हन की तरह सजाया गया है. इस अवसर पर प्रशासन की ओर से विविध कार्यक्रमों का आयोजन रखा गया है. आरएमके ग्राउंड में रविवार को विकास मेला आयोजित किया गया है.
जिसमें विभिन्न विभागों के स्टॉल लग रहे है. इन स्टॉलों के जरिये जिले में चल रही सरकारी योजनाओं और विकास के बारे में लोगों को जानकारी दी जायेगी. सुबह छात्र-छात्राओं के लिए साइकिल रेस प्रतियोगिता रखी गयी है जो झिरबा से वीर कुंवर सिंह मैदान तक होगी. इंडोर स्टेडियम में 10 से 4 बजे तक खेलकूद का आयोजन है. शाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है. शाम को ही बांका मैराथन का भी आयोजन किया गया है.

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