शहर में पीएचइडी कार्यालय के पास जो शौचालय है, उसकी स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है. कटोरिया बस स्टैंड में जो शौचालय है, उस पर केयर टेकर का ही कब्जा है. पुरानी बस स्टैंड का शौचालय बदतर व दुर्गंधित है. इस संबंध में शहर वासी मनोज कुमार, कुंदन कुमार, कमल यादव का कहना है कि शौचालय यहां कुछ जगहों पर जरूर बना है लेकिन वहां जाकर शौच करना मुश्किल है. शौचालय जाने से पहले निकलने की हड़बड़ी रहती है. चूंकि इन सुलभ शौचालय में इतनी गंदगी होती है वहां बैठना बीमारी को घर बुलाने जैसा है. शहर के रविश कुमार, सोनू कुमार, रिशु कहते हैं कि नगर पंचायत के उदासीन रवैये के कारण यहां शौचालय व पेयजल की स्थिति अच्छी नहीं है.
नयी सरकार, नयी उम्मीद : शहर का सुलभ शौचालय हो दुरुस्त
बांका. बांका को जिला बने अब करीब ढ़ाई दशक होने जा रहा है बावजूद इसके शहर में एक भी हाईटेक शौचालय नहीं है. शहर में आये राहगीरों को समस्या से जूझना पड़ता है. शहर में आम लोगों, आगंतुकों, मुसाफिरों, यात्रियों को शौच के लिए परेशानी होती है. शहर में कहने को तो तीन तीन सुलभ […]

बांका. बांका को जिला बने अब करीब ढ़ाई दशक होने जा रहा है बावजूद इसके शहर में एक भी हाईटेक शौचालय नहीं है. शहर में आये राहगीरों को समस्या से जूझना पड़ता है. शहर में आम लोगों, आगंतुकों, मुसाफिरों, यात्रियों को शौच के लिए परेशानी होती है. शहर में कहने को तो तीन तीन सुलभ शौचालय हैं लेकिन हाईटेक शौचालय एक भी नहीं है.
ले जाना पड़ता है अपना पानी
पुरानी बस स्टैंड का शौचालय बाहर और अंदर दोनों गंदा रहता है. जगह-जगह पानी बहता है. शौचालय में गंदगी फैली रहती है. और पेन भी काफी गंदा रहता है. जिनको शौचालय जाना हो, वह अपना पानी लेकर जाते हैं. हाथ धोने के नाम पर मिट्टी और सर्फ रहता है.
एक भी गेट नहीं है ठीक
शौचालय जाने वाले लोग जब शौचालय की स्थित देखते हैं तो उनको बदबू देने वाले स्थानों पर बैठना पड़ता है. अगर मजबूर ना हो, वे खुले स्थानों पर जाने को तैयार हो जाते हैं, लेकिन उस शौचालय में बैठना पसंद नहीं करते.