सदर अस्पताल में रात्रि के समय में भगवान भरोसे होता है महिला मरीजों का इलाज

सदर अस्पताल में रात्रि के समय में भगवान भरोसे होता है महिला मरीजों का इलाज फोटो 25 बांका 9 सदर अस्पताल की तसवीर नवनीत, बांका बांका: सदर अस्पताल बांका में पूजा, पर्व-त्योहारों में खास कर महिलाओं को लेकर रात के समय इलाज के लिए लेकर पहुंच रहे हैं तो सावधान रहें. सदर अस्पताल में रात्रि […]

सदर अस्पताल में रात्रि के समय में भगवान भरोसे होता है महिला मरीजों का इलाज फोटो 25 बांका 9 सदर अस्पताल की तसवीर नवनीत, बांका बांका: सदर अस्पताल बांका में पूजा, पर्व-त्योहारों में खास कर महिलाओं को लेकर रात के समय इलाज के लिए लेकर पहुंच रहे हैं तो सावधान रहें. सदर अस्पताल में रात्रि के समय में इलाज भगवान के भरोसे होता है. रात्रि के समय में अस्पताल में कार्यरत नर्स पर ही अस्पताल के महिला प्रसूति वार्ड की संपूर्ण जिम्मेदारी होती है. इलाज सटीक हुआ, तो ठीक, नहीं तो मरीज भगवान भरोसे.रात्रि के समय में चिकित्सकों की क्या है व्यवस्था: सदर अस्पताल बांका में रात्रि के समय में पुरुष चिकित्सक तो मिल जाते हैं लेकिन महिला चिकित्सक नहीं मिलती. रात्रि 9 बजे के बाद महिला मरीज काे प्रसव के दौरान किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न होती है तो महिला चिकित्सक ऑन कॉल बुलायी जाती है. लेकिन रात्रि के समय में जब से यह व्यवस्था ऑन कॉल की गयी है तब से कोई भी महिला चिकित्सक रात्रि के समय में नहीं आती है. भगवान भरोसे होता है इलाज: सदर अस्पताल बांका में रात्रि के समय में कोई गर्ववती महिला प्रसव के लिए पहुंचती है तो उनका इलाज कोई चिकित्सक नहीं बल्कि अस्पताल में कार्यरत नर्स द्वारा किया जाता है. नर्स अपनी सूझ बूझ और अपने अनुभव के आधार पर प्रसव कराती हैं. प्रसव के लिए आये मरीज की स्थिति बिगड़ती है तो महिला चिकित्सक को फोन के द्वारा सूचित किया जाता है. लेकिन वो नहीं पहुंचती हैं. उन्हें सुबह होने का इंतजार करने को कहा जाता है. जब सुबह चिकित्सक पहुंचती है तो तब तक पता चलता है कि भगवान भरोसे कुछ मरीज की जान बच जाती है. वही कुछ मरीज के पेट में ही बच्चा दम तोड़ देता है जिससे मरीज की भी जान खतरे में पड़ जाती है. ऐसे में महिला चिकित्सक उन्हें भागलपुर रेफर कर अपना जान छुड़ा लेती हैं. प्राइवेट क्लिनिकों में मची है लूट: जो मरीज सदर अस्पताल से इलाज करा रहे थे और वहां पर उनका सही इलाज नहीं हुआ वैसे मरीज प्राइवेट क्लिनिक में इलाज के लिए रात्रि में पहुंचते हैं तो वहां पर चिकित्सक मरीजों को बरगलाते हैं. उन्हें डरा कर ऑपरेशन द्वारा प्रसव करा लिया जाता है. इसके एवज में प्राइवेट क्लिनिक के चिकित्सक मोटी रकम वसूल करते हैं. इनमें से कुछ वैसे भी चिकित्सक हैं जिनकी ड्यूटी अस्पताल में भी है. ऐसी परिस्थिति में मरीज के परिजन भी मजबूर हो जाते हैं कि किसी तरह मरीज व आने वाले शिशु की जान बचायी जाये. चाहे उनके लिए उन्हें जितने भी रुपये खर्च करने पड़ें. हालांकि जो लोग सक्षम होते है उन्हें तो परेशानी नहीं होती. लेकिन मरीज के परिजन सक्षम नहीं हैं, तो वे बाजार से ब्याज पर रुपया लेकर अपने परिवार का जान बचाते हैं. किनके साथ हुई घटना: इस प्रकार की घटना विजया दशमी की रात्रि की है. शहर के विजय नगर वासी जो पेशे से रिक्शा चालक है वो अपनी पत्नी के प्रसव के लिए सदर अस्पताल पहुंचे. लेकिन वहां चिकित्सक की मौजूदगी नहीं रहने और मरीज की स्थिति को बिगड़ते देख वह वहां से मरीज को लेकर शहर के प्राइवेट क्लिनिक में पहुंचे और ब्याज पर रुपया उठा कर किसी प्रकार से अपने परिवार की जान बचायी. वहीं दूसरी घटना शहर के पुरानी बस स्टैंड निवासी की है. जब वह अपनी पत्नी के पेट में दर्द की शिकायत लेकर संध्या 4 बजे सदर अस्पताल पहुंचा तो वहां पर कोई भी महिला चिकित्सक मौजूद नहीं थी. वहां पर तैनात नर्स द्वारा मरीज का इलाज किया गया. लेकिन मरीज की स्थिति में सुधरने के बजाय रात्रि 10 बजे तक पूरी तरह बिगड़ गयी. वह भी अपने परिवार की जान बचाने के लिए प्राइवेट क्लिनिक की ओर भागा. और अपनी परिवार की जान बचायी. इसके लिए कौन है जिम्मेवार: रात्रि के समय में महिला चिकित्सक के अभाव में सदर अस्पताल में प्रसव कराने आये यदि किसी महिला की जान जाती है तो कौन जिम्मेवार है. बड़े- बड़े भवन, अत्याधुनिका सुविधा के बाद भी सरकारी अस्पताल अपने ही चिकित्सकों व यहां की व्यवस्था को लेकर बदनाम हैं. ऐसे में सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं. क्या कहते हैं सीएस: इस संबंध में सीएस डॉ सुधीर कुमार महतो ने बताया कि सदर अस्पताल में महिला चिकित्सकों की सुरक्षा के मद्देनजर रात्रि के समय में विशेष परिस्थिति में ऑन कॉल सुविधा है. लेकिन चिकित्सक ऑन कॉल नहीं पहुंचती हैं, तो इसकी जांच करायी जायेगी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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