कटाव की वजह से छोटे पड़ रहे छठ घाट

बौंसी : बौंसी बाजार का सबसे बड़ा छठ घाट के रूप में मधुसूदन मंदिर स्थित छिलका नदी घाट है जहां पूरे बाजार के लोगों का छठ होता है. यहां पर हजारों की संख्या मे श्रद्धालु पहुंचते हैं. लेकिन 15 साल पहले आयी बाढ़ ने पूरे छठ घाट को तहस नहस कर दिया था. वहां पर […]

बौंसी : बौंसी बाजार का सबसे बड़ा छठ घाट के रूप में मधुसूदन मंदिर स्थित छिलका नदी घाट है जहां पूरे बाजार के लोगों का छठ होता है. यहां पर हजारों की संख्या मे श्रद्धालु पहुंचते हैं. लेकिन 15 साल पहले आयी बाढ़ ने पूरे छठ घाट को तहस नहस कर दिया था. वहां पर छिलका नदी पर पानी रोकने के लिए बना बांध भी बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया था,

जिसके बाद घाट पर पानी का ठहराव नहीं रह गया. लोग मुश्किल से थोड़े पानी में ही किसी प्रकार से छठ करते हैं. दरअसल यहां पर ही बहता हुआ पानी व्रतियों को मिलता है, जिसके चलते लोग यहां पर आते हैं. सरकारी स्तर पर छठ घाट पर कोई व्यवस्था नहीं की जाती है. बौंसी में छठ पूजा समिति है,

जिसके सदस्य मिलजुल कर किसी प्रकार साफ सफाई एवं मार्ग को दुरुस्त करते हैं. वहीं छठ घाट कच्ची मिट्टी होने की वजह से हर साल बरसात में कटाव होकर सिकुड़ता जा रहा है जबकि दिनों दिन व्रतियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. स्थानीय लोगों की मांग है कि अगर सरकारी योजना से छिलका नदी पर बांध की मरम्मती कर दिया जाए तो व्रतियों को तो फायदा होगा ही ज्यादा फायदा किसानों को भी होगा. लेकिन प्रशासनिक उदासीनता की वजह से कभी भी इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया.

अगर इसे बना दिया जाता तो सैकड़ो एकड़ भूमि को पटवन के लिए पानी की सुविधा हो जाती. दुसरी समस्या छठ घाट पर जाने वाले मार्ग की है जिसमें गड्ढे ही गड्ढे हैं काफी कष्ट सह कर व्रतियों को वहां पहुंचना पड़ता है. स्थानीय बाजार के राजाराम अग्रवाल, बंटी चौधरी, गोविंदा कुमार, राजा झा, महेश ड्रोलिया, मुकेश डालमियां आदि ने मांग की है कि इस समस्या को गंभीरता से लेकर प्रशासन के द्वारा इसकी जीर्णोद्धार किया जाये.

कम से कम घाट में जमे मिट्टी एवं कचरे को जेसीबी से हटा दिया जाये, तो व्रत करने भर पानी की व्यवस्था तो हो जायेगी. कहते हैं अधिकारीसीओ संजीव कुमार ने बताया कि मेरे स्तर से जितना भी संभव है साफ-सफाई आदि का काम कराया जायेगा.

सेवानिवृत्त शिक्षक के निधन पर शोक बौंसी. कुड़रो निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक यदुनाथ झा के निधन होने पर बौंसी के लोगों ने गहरा शोक प्रकट किया है. स्व झा 100 वर्ष के थे. वे शिक्षक के अलावा साहित्यकार व समाजसेवी भी थे. उनके पुत्र अवध किशोर झा उर्फ बबलू झा, श्यामकिशोर झा, ब्रज किशोर झा एवं अनंत किशोर झा हैं. उनके निधन पर बमबम पांडेय, चितरंजन मिश्रा, रुपेश चौधरी, राहुल झा, राजू मंडल, प्रभाकर झा, अमित यादव सहित अन्य ने शोक प्रकट किया है.

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