कांवरिया पथ पर धीमी गति से हो रहा काम, अब भी कई पथ हैं जजर्र

बांका: विश्व प्रसिद्ध श्रवणी मेले में पहुंचने वाले कांवरियों को इस बार बड़े-बड़े कंकर-पत्थर पर चलने की मजबूरी हो सकती है, अगर जिला प्रशासन ने समय रहते इसकी मरम्मत नहीं करायी तो. श्रवणी मेले का आरंभ होने में अब बस दो से तीन हफ्ते का वक्त रह गया है लेकिन अब भी अधिकांश भाग मरम्मत […]

बांका: विश्व प्रसिद्ध श्रवणी मेले में पहुंचने वाले कांवरियों को इस बार बड़े-बड़े कंकर-पत्थर पर चलने की मजबूरी हो सकती है, अगर जिला प्रशासन ने समय रहते इसकी मरम्मत नहीं करायी तो. श्रवणी मेले का आरंभ होने में अब बस दो से तीन हफ्ते का वक्त रह गया है लेकिन अब भी अधिकांश भाग मरम्मत के लिए बचा हुआ है.

हालांकि सड़कों के मरम्मत का कार्य आरंभ हो चुका है. जगह-जगह बालू और मिट्टी गिराये जार रहे हैं. कहीं कहीं पोकलेन से सड़क की मरम्मत भी आरंभ है लेकिन अब भी कई ऐसे स्थान है जहां पर मरम्मत होना बाकी है. अगर काम जल्दी जल्दी नहीं निबटाया गया तो पथ की संपूर्ण मरम्म्त नहीं हो पायेगी.

सड़कों पर है गड्ढा
जमुई धर्मशाला के पास से अगर टंगेश्वर तक के पथ का जायजा लिया जाय तो कई ऐसे स्थान हैं जहां पर अब भी बड़े और नुकीला पत्थर सड़कों पर है. इस मार्ग से कांवरिया गुजरेंगे तो उनके पैर में छाला पड़ गया जायेगा. हालांकि इस वक्त जिलाधिकारी की सख्ती के कारण ठेकेदार काम कर रहे हैं लेकिन काम में काफी धीरे रहने के कारण समय पर पूरा होने की संभावना काफी कम दिखायी दे रही है. जिलाधिकारी ने आदेश दिया था कि पथ पर कंकर को चाल कर बालू देना है लेकिन अगर जमुई कैंप से लेकर जिलेविया मोड़ तक निरीक्षण किया जाये तो उसमें बालू कम मिट्टी ज्यादा है.

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